ठाणे, 14 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने जांच में खामियों, गवाहों की कमी और पीड़िता को अदालत में पेश कर उसका बयान दर्ज नहीं कराए जाने का हवाला देते हुए कथित तौर पर देह व्यापार का धंधा चलाने के मामले में तीन लोगों को बरी कर दिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. एस. रेंगे ने 11 अगस्त को जारी आदेश में तेजल हर्षद मेहता (40), सुनीता राजू सिंह (55) और नरेंद्र ओमप्रकाश धनगर (50) को बरी कर दिया।
इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 370 (मानव तस्करी) और अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आदेश की प्रति बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराई गई।
अभियोजन के अनुसार, पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 30 दिसंबर, 2020 को एक फर्जी ग्राहक भेजकर मीरा रोड की एक इमारत पर छापा मारा था।
पुलिस ने कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया, एक महिला को मुक्त कराया और नकदी तथा मोबाइल फोन जब्त किए थे।
अदालत ने छापेमारी की कार्रवाई को लेकर कई गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा किया।
अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष के गवाहों ने पहले से तय संकेत को लेकर एक जैसी गवाही नहीं दी है।”
अदालत ने यह भी कहा कि फर्जी ग्राहक और आरोपियों के बीच हुई बातचीत को अभियोजन पक्ष के गवाह ने नहीं सुना था, यहां तक कि पंचनामों में भी कथित बातचीत या सौदेबाजी का कोई उल्लेख नहीं है।
अदालत ने कहा, ‘‘अभियोजन का मामला बिना किसी ठोस सबूत के है… (क्योंकि) न तो किसी चौकीदार, पड़ोसी, आवासीय सोसाइटी के पदाधिकारी और न ही किसी निवासी से पूछताछ की गई। सीसीटीवी फुटेज भी एकत्र नहीं की गई।’’
अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि जिस महिला को वहां से मुक्त कराया गया था, उसे भी गवाही के लिए अदालत में कभी पेश नहीं किया गया।
भाषा जितेंद्र सुरेश
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