ठाणे की अदालत ने 17 साल पुराने मामले में शिवसेना के आठ कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों को बरी किया

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ठाणे की अदालत ने 17 साल पुराने मामले में शिवसेना के आठ कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों को बरी किया

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  • Publish Date - August 14, 2026 / 01:08 AM IST,
    Updated On - August 14, 2026 / 01:08 AM IST

ठाणे, 13 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ अविभाजित शिवसेना द्वारा किए गए एक प्रदर्शन से जुड़े 17 साल पुराने आपराधिक मामले में बृहस्पतिवार को पार्टी के आठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है।

जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश विश्वास गणपत मोहिते ने यह फैसला सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अभियोजन पक्ष विश्वसनीय सबूतों के माध्यम से आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। इन आरोपियों में पार्टी के तत्कालीन राज्य सचिव भी शामिल थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, तत्कालीन बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ 30 जून 2009 को शिवसेना के नेतृत्व में एक विरोध रैली का आयोजन किया गया था।

रैली ठाणे शहर के नौपाड़ा इलाके के चंदनवाड़ी से शुरू हुई और वागले एस्टेट स्थित महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल (एमएसईबी) के कार्यालय तक पहुंची।

तत्कालीन विपक्षी दल शिवसेना के करीब 700 से 800 पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए थे। एमएसईबी कार्यालय पहुंचने के बाद कई कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने और अपनी शिकायतें रखने के लिए परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। रैली के बाद उसी दिन पुलिस ने शिवसेना के कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया।

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। इनमें गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान, नुकसान पहुंचाना तथा चोट या हमले की तैयारी के बाद घर में अनधिकृत प्रवेश से संबंधित धाराएं शामिल थीं।

भाषा प्रचेता संतोष

संतोष