ठाणे की अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई
ठाणे की अदालत ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई
ठाणे, 22 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 12 साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में एक व्यक्ति को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि नाबालिग की सहमति का कानून के तहत कोई महत्व नहीं होता।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रेमल एस. विठलानी ने आरोपी मोहम्मद राशिद ताहिद आलम (30) को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की संबंधित धाराओं के तहत शुक्रवार को दोषी ठहराया।
अदालत ने उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ ही उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
विशेष लोक अभियोजक रेखा एन. हिवराले ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए सात गवाहों से पूछताछ की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी शादी का झांसा देकर 29 जुलाई 2021 को बच्ची को ठाणे शहर के अलग-अलग स्थानों पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
अदालत ने कहा कि भले ही यह संबंध पहली नजर में सहमति से बना हुआ प्रतीत हो रहा हो, लेकिन जब पीड़िता की उम्र 18 साल से कम होती है तो कानून की नजर में उसकी सहमति मान्य नहीं होती।
अदालत ने कहा, ‘‘जब पीड़िता की मौखिक गवाही चिकित्सकीय साक्ष्यों से समर्थित हो तो यह मानने के लिए पर्याप्त कारण हैं कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि आरोपी ने पीड़िता के साथ कई बार यौन संबंध बनाए, भले ही यह उसकी सहमति से हुआ हो।’’
अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा छह के तहत आरोपी को दोषी ठहराया। इस धारा में न्यूनतम 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि, अदालत ने आरोपी को अपहरण के आरोप से बरी कर दिया क्योंकि उसने पाया कि पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ गई थी।
अदालत ने पीड़िता को मुआवजा दिए जाने की राशि तय करने के लिए मामले को ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास भेजने की भी सिफारिश की।
भाषा शोभना सिम्मी
सिम्मी

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