अदालत ने ‘खामोश’ शब्द को शत्रुघ्न सिन्हा के व्यक्तित्व से जुड़ा बताया

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अदालत ने ‘खामोश’ शब्द को शत्रुघ्न सिन्हा के व्यक्तित्व से जुड़ा बताया

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  • Publish Date - February 21, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 07:00 PM IST

मुंबई, 21 फरवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने ‘खामोश’ शब्द को अभिनेता-नेता शत्रुघ्न सिन्हा की शख्सियत से विशेष रूप से जुड़ा हुआ बताया और उनकी सहमति के बिना ऑनलाइन सामग्री बनाने के लिए उनके नाम, तस्वीरों एवं अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी।

सिन्हा द्वारा दायर याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने 16 फरवरी को सभी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस तरह की सामग्री को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। साथ ही, भविष्य में इस तरह की सामग्री को अनधिकृत रूप से अपलोड करने पर भी रोक लगा दी गई।

आदेश की विस्तृत प्रति शनिवार को उपलब्ध हो पाई।

वकील हिरेन कामोद के माध्यम से दायर याचिका में अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा और उनके नाम, छवि और अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं, जिनमें उनका प्रसिद्ध डायलॉग ‘खामोश’ भी शामिल है, के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ स्थायी रोक या आदेश का अनुरोध किया गया।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सिन्हा की संवाद बोलने की शैली अनूठी है, और वह विशेष रूप से पर्दे पर ‘खामोश’ कहने के अपने खास तरीके के लिए जाने जाते हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस बात को दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि खामोश अभिव्यक्ति, जिसे वादी (सिन्हा) ने अपनी एक फिल्म में अपनी अनूठी और विशिष्ट शैली में बोला था, विशेष रूप से वादी के व्यक्तित्व से जुड़ी हुई है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह राय है कि सिन्हा के नाम, छवि, व्यक्तित्व के पहचान की रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि अभिनेता द्वारा अपने नाम और छवि के दुरुपयोग के संबंध में प्रस्तुत सामग्री से उनके व्यक्तित्व अधिकारों, सार्वजनिक अधिकारों और उनकी निजता के उल्लंघन का पता चलता है।

इस तरह की सभी ऑनलाइन सामग्री को हटाने का आदेश देते हुए, अदालत ने सिन्हा की याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की।

आदेश में यह भी कहा गया कि खासकर प्रसिद्ध लोगों के मामले में व्यक्तित्व अधिकारों की अवधारणा को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर व्यावसायिक लाभ के लिए उनके अनधिकृत इस्तेमाल के कारण गति मिली है।

न्यायमूर्ति देशमुख ने कहा कि सिन्हा की फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल और उनके व्यक्तित्व पर आधारित डिजिटल रूप से हेरफेर की गई या एआई-जनित सामग्री, प्रारंभिक नजर में उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन है।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप