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Aaj Ka Panchang 17 February 2026: नई दिल्ली: आज 17 फरवरी 2026, मंगलवार को फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह संवत् 2082 का महत्वपूर्ण दिन माना जा रहा है। इस बार फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। फिर भी धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष महत्व रखता है और श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान और ध्यान के माध्यम से पुण्य अर्जित करते हैं।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि सायं 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। आज परिघ योग रात्रि 12 बजकर 29 मिनट (18 फरवरी) तक रहेगा। करणों की बात करें तो नागव करण सायं 05 बजकर 30 मिनट तक और किंस्तुघ्न करण प्रातः 05 बजकर 17 मिनट (18 फरवरी) तक रहेगा। सूर्योदय प्रातः 06 बजकर 58 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 06 बजकर 13 मिनट पर होगा। आज चंद्रोदय नहीं होगा, जबकि चंद्रास्त सायं 06 बजकर 10 मिनट पर होगा। ग्रह स्थिति के अनुसार सूर्यदेव कुंभ राशि में और चंद्रदेव मकर राशि में स्थित हैं।
आज के शुभ मुहूर्तों में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। अमृत काल प्रातः 10 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 17 मिनट तक है। वहीं अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 03 बजकर 24 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड प्रातः 09 बजकर 47 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक और गुलिकाल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से लगभग 02 बजे तक रहेगा। इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान हैं, जो सायं 09 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। धनिष्ठा नक्षत्र के जातक आत्मविश्वासी, परिश्रमी, साहसी और कलात्मक प्रतिभा से संपन्न माने जाते हैं। इस नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं, जबकि राशि स्वामी शनि देव हैं। धनिष्ठा का प्रतीक ढोल या बांसुरी है, जो ऊर्जा और लय का संकेत देता है।
खगोलीय दृष्टि से आज का सूर्य ग्रहण एक सुंदर घटना मानी जा रही है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं होगा, बल्कि ऐसा दृश्य बनेगा जिसमें चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेगा और किनारों पर सूर्य का चमकता हुआ घेरा दिखाई देगा। यह दृश्य लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका और उसके आसपास के दक्षिणी महासागर क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत सहित एशिया के अधिकांश देशों में यह ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भगवान का स्मरण, मंत्र जप और ध्यान करना शुभ माना जाता है। ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, घर की शुद्धि और दान-पुण्य करना लाभकारी होता है। वहीं ग्रहण के दौरान भोजन करने और बिना सुरक्षा के सूर्य को देखने से बचना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टि से भी सूर्य ग्रहण को केवल सुरक्षित सोलर चश्मे से ही देखने की सलाह दी जाती है।