Bhaum Pradosh Vrat 2026: मंगल दोष वालों के लिए बेहद खास है भौम प्रदोष व्रत, जानें वो खास उपाय, जिसे करने से पूरी होगी हर मनोकामना!

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Bhaum Pradosh Vrat 2026: हर प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन भौम प्रदोष को बहुत खास माना जाता है। भाद्रपद महीने में यह व्रत 8 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन भक्त भगवान शिव की पूजा और व्रत कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की पूजा का विशेष फल मिलता है।

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  • Publish Date - September 7, 2026 / 12:24 PM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 12:26 PM IST

(Bhaum Pradosh Vrat 2026/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • 8 सितंबर को भौम प्रदोष व्रत
  • शाम 6:35 से पूजा का शुभ समय
  • शिवजी के साथ हनुमान जी की पूजा

Bhaum Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन आती है तो इसे भौम प्रदोष व्रत (Bhaum Pradosh Vrat 2026) कहा जाता है। इस बार सितंबर 2026 में भाद्रपद मास का यह व्रत मंगलवार 8 सितंबर को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। मंगल दोष से परेशान लोग भी इस दिन विशेष पूजा और व्रत करते हैं।

पूजा के लिए ये रहेगा शुभ समय

पंचांग के मुताबिक 8 सितंबर 2026 को त्रयोदशी तिथि दोपहर 2:42 बजे से शुरू होगी और 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे समाप्त होगी। भौम प्रदोष की पूजा (Bhaum Pradosh Vrat 2026) के लिए प्रदोष काल को सबसे अच्छा समय माना जाता है। 8 सितंबर को पूजा का शुभ समय शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक रहेगा। इस दौरान शिव पूजा और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।

मंगल दोष और कर्ज से जुड़ी मान्यता

भौम प्रदोष व्रत को भगवान शिव और मंगल देव की कृपा पाने का विशेष अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत और पूजा से कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कर्ज, आर्थिक परेशानियों और जीवन में आने वाली रुकावटों से राहत मिलने की मान्यता है। इसके अलावा मानसिक शांति, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

भौम प्रदोष के दिन सूर्यास्त के आसपास भगवान शिव की पूजा (Bhaum Pradosh Vrat 2026) करने की परंपरा है। सबसे पहले शिवलिंग का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, अक्षत, धूप, दीप और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जाप करें। मंगलवार होने के कारण इस दिन हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

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भौम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा?

भाद्रपद मास का भौम प्रदोष व्रत 8 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।

भौम प्रदोष पूजा का शुभ समय क्या है?

पूजा का समय शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत क्यों खास माना जाता है?

मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भगवान शिव और मंगल देव की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है।

भौम प्रदोष पर किन देवी-देवताओं की पूजा करें?

इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।