(Holika Dahan Rituals/ Image Credit: IBC24 News)
Holika Dahan Rituals: हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन का त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों से होली का पर्व भी मनाया जाता है। इस साल होलिका दहन 03 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।
होलिका दहन के दौरान लकड़ियों और गोबर के उपलों को आग में अर्पित किया जाता है। जब आग जलती है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे सारी नकारात्मकता और बुरी ऊर्जा समाप्त हो रही हो। पुराने सामान को भी आग में डालकर नकारात्मक प्रभाव और रोगों से मुक्ति पाने की मान्यता है। लोग मानते हैं कि यह मानसिक शुद्धि और घर-परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है।
मान्यता है कि होलिका की आग में घर के पुराने सामान और गोबर के उपले अर्पित करने से क्लेश, बीमारी और दरिद्रता दूर होती है। यह परंपरा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए निभाई जाती है। विशेष रूप से गाय के गोबर को पवित्र माना गया है और इसे आग में डालने से वातावरण शुद्ध होता है और कीटाणु नष्ट होते हैं।
होलिका में गोबर के उपले जलाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं। उपलों से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। इसी कारण से यज्ञ और हवन में भी गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है। यह परंपरा सदियों से हमारे समाज में चलती आ रही है।
होलिका दहन में गाय के उपले और पुराने सामान अर्पित करने से घर-परिवार की बाधाएं दूर होती हैं। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यही वजह है कि आज भी लोग इस परंपरा का पालन बड़े श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं। होलिका दहन न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि मानसिक और सामाजिक शुद्धिकरण का भी प्रतीक है।