नई दिल्ली। Bhakoot Dosh in Kundali : सनातन धर्म में विवाह पूर्व कुंडली मिलान का विधान है। कुंडली मिलान करने से वर और वधू के वैवाहिक जीवन की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है। इससे गण, मैत्री, भाग्य, प्रकृति, स्वभाव, नाड़ी और भकूट दोष का पता चलता है। भकूट दोष एक ज्योतिषीय दोष है जो विवाह कुंडली मिलान में महत्वपूर्ण माना जाता है। जब पुरुष और स्त्री की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति 6-8, 9-5 या 12-2 के संयोजन का होता है, तब भकूट दोष उत्पन्न होता है। इसे ज्योतिषीय दोषों में से एक माना जाता है।
अगर दंपति की कुंडली में चंद्रमा एक दूसरे से 6-8, 9-5 या 12-2 राशियों में स्थित होता हैं, तो भकूट / भकूट दोष का निर्माण होता है।
यदि मेष राशि से लड़का और कन्या राशि से लड़की, लड़के का चंद्रमा लड़की के चंद्रमा से 8 वें और लड़की के चंद्रमा लड़के के चंद्रमा से छठे होंगे। इस मामले में, 6-8 का संयोजन बनता है।
6-8 का भकूट: यह संयोजन जोड़ी के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होगा और इससे ऑपरेशन भी हो सकता है। साथ ही अलग होने की संभावना प्रबल होती है।
9-5 का भकूट: इससे संतान संबंधी समस्याएं और संबंध में कई बड़ी समस्याएं हो सकती हैं। (जहां एक व्यक्ति का चंद्रमा कन्या है और दूसरा व्यक्ति वृषभ है)
12-2 का भकूट: वित्तीय स्थिति बुरी तरह प्रभावित होगी और शादी में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं होंगी। (जहां एक व्यक्ति का चंद्रमा मिथुन है और दूसरा व्यक्ति वृषभ है)
यदि कुंडली में भकूट के अलावा हानिकारक पहलू हैं, तो जातक के तलाक, आपसी अलगाव या यहां तक कि एक साथी की मृत्यु का कारण बन सकता है।
भकूट दोष का नकारात्मक प्रभाव
भकूट दोष वैवाहिक जीवन में कई गंभीर मुद्दों को जन्म दे सकता है। ये समस्याएं स्पष्ट नहीं होंगी, लेकिन धीरे-धीरे वैवाहिक जीवन को नष्ट कर देता है। व्यक्ति निम्नलिखित प्रभावों को नोटिस करेगा:
वे अपनी शादी में वित्तीय समस्याओं का सामना करेंगे। यह समस्या कई मायनों में हो सकती है। उदाहरण के लिए, भागीदारों में से एक पूरी तरह से दूसरे पर निर्भर होने के कारण, भारी निवेश या कड़ी मेहनत के बाद व्यापार में विफल रहना।
संतान को लेकर परेशानी होगी। इससे विवाह में असंतुष्ट शारीरिक संबंध जैसे मुद्दे भी आ सकते हैं।
वे अपने संबंधों में निरंतर असहमति और झगड़े का सामना करेंगे जिससे कानूनी अलगाव हो सकता है।
अगर आपकी कुंडली में भकूट दोष एक और पुरुष दोष के साथ आता है तो यह एक साथी की मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
भकूट दोष के निवारण के उपाय
यदि व्यक्ति का विवाह हो चुका है और कुंडली में भकूट दोष है तो इसका पूर्णतः निवारण नहीं होता है, लेकिन कुछ उपाय का पालन करने से इसके प्रभाव को काम किया जा सकता है। आइए जानते हैं इससे जुड़े उपाय।
सबसे पहले महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें और भगवान शिव की विधिवत उपासना करें। ऐसा करने से कई प्रकार के दोष दूर होते हैं।
इसके साथ विवाह के उपरांत पत्नी को गुरुवार का व्रत जरूर रखना चाहिए। इससे परिवार में आ रही समस्याएं दूर होती हैं।
साथ ही गुरुवार के दिन ही स्नान-ध्यान के बाद जल में हल्दी मिलाकर केले के पौधे में यह जल प्रदान करना चाहिए।
रोजाना स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें।
इसके साथ रोज नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इन उपायों का पालन करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।