भोपाल, दो मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बड़े उद्योगपतियों के लिए काम करते हुए किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि पार्टी के घोषणापत्र में किसानों को ‘कानूनी रूप’ से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रदान करने का वादा शामिल है।
‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के मध्य प्रदेश में प्रवेश करने के बाद मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने जातिगत जनगणना की मांग दोहराई और दावा किया कि देश की 73 प्रतिशत आबादी की अर्थव्यवस्था के अधिकांश क्षेत्रों के साथ-साथ नौकरशाही के शीर्ष स्तरों पर कोई उपस्थिति नहीं है।
राहुल ने बाद में ग्वालियर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र में सत्ता में आने के बाद जातिगत जनगणना कराना विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की सरकार का पहला काम होगा।
उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा।
राहुल ने मुरैना में आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने दस से पंद्रह उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए लेकिन किसानों को एमएसपी (कानूनी रूप से गारंटी) देने से इनकार कर रही है।
पंजाब और हरियाणा में किसान संगठन वर्तमान में फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत एमएसपी के लिए आंदोलन कर रहे हैं। राहुल ने कहा, ”हमने घोषणापत्र में वादा किया है कि केंद्र की सत्ता में आने पर कांग्रेस देश के किसानों को कानूनी तौर पर एमएसपी देगी।”
उन्होंने आरोप लगाया कि किसान केवल एमएसपी, अपनी उपज और कड़ी मेहनत के लिए सही कीमत मांग रहे हैं लेकिन जब फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है तो केंद्र सरकार कृषि वस्तुओं की कीमतों को कम करने के लिए अपनी आयात-निर्यात नीति में बदलाव कर देती है।
राहुल ने कहा, ‘यह बदलाव किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करता है और सरकार फिर से दरें बढ़ा देती है (नीति में बदलाव करके)।” भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि उनकी पार्टी इस यात्रा के जरिए लोगों को प्यार से एक साथ लाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि बेरोजगारी का स्तर 40 वर्षों में उच्चतम स्तर पर है। राहुल ने कहा कि देश में बेरोजगारी पाकिस्तान और बांग्लादेश की तुलना में दोगुनी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर और नोटबंदी को लागू करने के नरेन्द्र मोदी सरकार के फैसले से बेरोजगारी में वृद्धि हुई क्योंकि इन उपायों ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों को, जो युवाओं को रोजगार देते हैं।
अदाणी समूह का नाम लेते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि हर क्षेत्र में पांच से छह बड़ी कंपनियों का एकाधिकार है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (जो आबादी का 50 प्रतिशत है), दलित (15 प्रतिशत) और आठ प्रतिशत आदिवासी सहित 73 प्रतिशत लोगों का सरकार और विभिन्न अन्य क्षेत्रों में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
उन्होंने कहा कि जाति-आधारित जनगणना उनके लिए न्याय सुनिश्चित करेगी। राहुल ने दावा किया, ”सरकार चलाने वाले 90 शीर्ष भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों में से केवल तीन-तीन ओबीसी और दलित समुदायों से हैं और बजट तय होने पर उन्हें कोने में बैठा दिया जाता है।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि हालांकि इन समुदायों के नाम मनरेगा कार्यबल, मजदूरों और स्वच्छता श्रमिकों की सूची में पाए जाते हैं।
गांधी ने कहा कि कांग्रेस ने मौजूदा सामाजिक अन्याय और आर्थिक अन्याय की स्थिति के कारण चल रहे मार्च को ‘न्याय’ (न्याय) कहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जातिगत जनगणना एक क्रांतिकारी कदम है और यह इन समुदायों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में न्याय और समान भागीदारी सुनिश्चित करेगा। भाषा दिमो जितेंद्र
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