विश्व कप का इस्तेमाल उपकरणों को बेहतर बनाने के लिए करना चाहते हैं: तीरंदाज ज्योति और धीरज

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विश्व कप का इस्तेमाल उपकरणों को बेहतर बनाने के लिए करना चाहते हैं: तीरंदाज ज्योति और धीरज

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  • Publish Date - May 26, 2026 / 06:27 PM IST,
    Updated On - May 26, 2026 / 06:27 PM IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) भारतीय तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम और धीरज बोम्मादेवरा आगामी तीरंदाजी विश्व कप चरणों का उपयोग इस वर्ष होने वाले एशियाई खेल से पहले अपने उपकरणों में बदलाव के परीक्षण के लिए करेंगे।

ये दोनों तीरंदाज 12 सदस्यीय भारतीय टीम का हिस्सा हैं, जो 19 सितंबर से आइची-नागोया में शुरू होने वाले एशियाई खेलों में भाग लेगी।

ज्योति ने भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन मीडिया वार्ता में कहा, “मुझे कुछ चीजें तय करनी हैं। मैं उपकरणों के साथ कुछ नया आजमाना चाहती हूं और विश्व कप यह देखने के लिए एक अच्छा मंच होगा कि क्या चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।”

उन्होंने कहा, “जिन तीरों का मैं पहले इस्तेमाल करती थी, उनका उत्पादन बंद हो गया है और हमने दूसरे तीरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। मैं 2017 से उन्हीं तीरों का इस्तेमाल कर रही थी। मैं उसकी अभ्यस्त थी, इसलिए यह आसान था।”

अपने चौथे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहीं ज्योति ने कहा, “लेकिन अब नए तीरों के साथ मैं प्रयोग करना चाहती हूं और देखना चाहती हूं कि मेरे लिए कौन सा तीर उपयुक्त है। एशियाई खेलों से पहले हमारे पास समय है, इसलिए मैं विश्व कप में इन सभी चीजों की जांच कर सकती हूं।”

यह प्रयोग तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे और चौथे चरण के दौरान अंताल्या (नौ से 14 जून) और मैड्रिड (सात से 12 जुलाई) में होगा।

धीरज बोम्मादेवरा ने कहा कि वह भी अपने उपकरणों, खासकर धनुष की सेटिंग्स में बदलाव कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “बेहतर प्रदर्शन के लिए हर तीन महीने में ‘लिंब्स’ बदलने पड़ते हैं। मुझे पिछले दिसंबर में नए मॉडल दिए गए थे, लेकिन समय की कमी के कारण उनका परीक्षण नहीं हो पाया था।”

खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण ने एनटीपीसी के सीएसआर सहयोग से तीरंदाजी विश्व कप के पहले चरण से पहले 26 मार्च से पांच अप्रैल तक मेक्सिको में 57.42 लाख रुपये की कुल लागत वाले प्रशिक्षण शिविर को मंजूरी दी।

इस शिविर में दीपिका कुमारी और अतनु दास सहित कई शीर्ष भारतीय तीरंदाजों ने भाग लिया, जिन्हें पहली बार उन्नत तकनीक का उपयोग करने का अवसर मिला।

ज्योति ने बताया, “विश्व कप से पहले हम एक सप्ताह के लिए वहां थे। वहां तीरों की जांच के लिए ‘स्पाइन’ नामक नई तकनीक थी, जिसका उपयोग दुनिया भर के तीरंदाज कर रहे थे। हमें इसे पहली बार इस्तेमाल करने का मौका मिला।”

इस महीने की शुरुआत में सोनीपत में हुए चयन परीक्षणों में असफल रहने के बाद एशियाई खेलों में भारत के पास अनुभवी खिलाड़ी दीपिका और अतनु नहीं होंगे।

ज्योति और धीरज दोनों टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के मुख्य समूह का हिस्सा हैं और उन्हें अब तक क्रमशः लगभग 24.56 लाख रुपये और 66.28 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई है।

ज्योति को पिछले वर्ष 20 जुलाई से पांच अगस्त तक जर्मनी के बीटर आर्चरी सेंटर में आयोजित व्यक्तिगत विदेशी प्रशिक्षण शिविर के लिए भी वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी।

भाषा आनन्द सुधीर

सुधीर