वनडे सीरीज के बाद इंग्लैंड दौरे पर टी20 में खराब प्रदर्शन की समीक्षा करेगा बीसीसीआई: सैकिया

वनडे सीरीज के बाद इंग्लैंड दौरे पर टी20 में खराब प्रदर्शन की समीक्षा करेगा बीसीसीआई: सैकिया

वनडे सीरीज के बाद इंग्लैंड दौरे पर टी20 में खराब प्रदर्शन की समीक्षा करेगा बीसीसीआई: सैकिया
Modified Date: July 10, 2026 / 06:44 pm IST
Published Date: July 10, 2026 6:44 pm IST

(कुशान सरकार)

नयी दिल्ली, चार जुलाई (भाषा) भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार 19 जुलाई को वनडे सीरीज समाप्त होने के बाद भारतीय टीम के आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।

सैकिया ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड जल्दबाजी में किसी भी तरह का फैसला नहीं करेगा।

भारतीय टीम आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 0-2 से हार चुकी है जबकि इंग्लैंड के खिलाफ भी पांच मैचों की टी20 सीरीज गंवाकर 0-3 से पीछे है।

हालांकि पता चला है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के भविष्य पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है क्योंकि उनका बीसीसीआई के साथ अनुबंध 2027 वनडे विश्व कप तक है।

सैकिया ने शुक्रवार को एडिनबर्ग में आईसीसी की वार्षिक बैठक के इतर पीटीआई से कहा, ‘‘बीसीसीआई फिलहाल इंग्लैंड के खिलाफ जारी टी20 सीरीज में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर नजर रखे हुए है जो उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। ’’

उन्होंने कहा कि समीक्षा में पूरे प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, लेकिन बोर्ड किसी भी तरह का जल्दबाजी वाला फैसला नहीं करेगा।

सैकिया ने कहा, ‘‘यह कोई असामान्य स्थिति नहीं है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा हो सकता है। हम इसे टीम के खराब दौर के रूप में देखते हैं। 19 जुलाई को वनडे सीरीज समाप्त होने और टीम के भारत लौटने के बाद मुख्य सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक होगी जिसमें इंग्लैंड दौरे पर हुई कमियों पर चर्चा की जाएगी। हमें उम्मीद है कि वनडे सीरीज में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी। ’’

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समीक्षा बैठक ‘‘सिर्फ टीम के प्रदर्शन और कमियों को दूर करने के उपायों तक सीमित रहेगी। इसके अलावा किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं होगी। ’’

गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय टीम के नाम कई अनचाहे रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं। इनमें घरेलू टेस्ट सीरीज में न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 से क्लीन स्वीप, घरेलू वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड से हार और आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाना शामिल है। अब इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में संभावित 0-4 की हार टीम के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक मानी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक समीक्षा बैठक में गंभीर और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर शामिल होंगे। वहीं, टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर के जिम्बाब्वे दौरे पर तीन मैचों की सीरीज के लिए रवाना होने की संभावना है इसलिए उनकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज, ऑस्ट्रेलिया दौरे और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी बीसीसीआई समीक्षा बैठकें कर चुका है।

गौरतलब है कि केवल चार महीने पहले ही गंभीर के मार्गदर्शन में भारत ने अपना टी20 विश्व कप खिताब सफलतापूर्वक बचाया था। ऐसे में दो आईसीसी ट्रॉफी दिलाने वाले कोच को सिर्फ खराब दौर के कारण हटाए जाने की संभावना नहीं लग रही है।

हालांकि अहमदाबाद में टी20 विश्व कप जीत के बाद से टीम में काफी बदलाव हुए हैं और नए कप्तान अय्यर की अगुवाई वाली मौजूदा टीम अपने पुराने स्तर से काफी कमजोर नजर आई है।

फिर भी माना जा रहा है कि समीक्षा बैठक में टी20 टीम के बेहद खराब प्रदर्शन को लेकर गंभीर से कुछ महत्वपूर्ण सवाल जरूर पूछे जाएंगे।

यह सही है कि गंभीर चयन समिति के सदस्य नहीं हैं और टीम चुनने का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं का होता है। लेकिन अंतिम एकादश तय करने में उनकी भूमिका सबसे अहम रही है, खासकर ऐसी टीम में जिसमें बड़े स्टार खिलाड़ियों की संख्या कम है।

हालांकि चयन समिति की आलोचना जिम्बाब्वे दौरे की टी20 सीरीज के लिए संजू सैमसन को टीम में शामिल नहीं करने को लेकर हो सकती है, लेकिन गंभीर से यह सवाल भी पूछा जा सकता है कि उन्होंने अंतिम एकादश से सैमसन को बाहर कर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मौका क्यों दिया जबकि इस युवा खिलाड़ी को भविष्य में अवसर मिल सकता था।

हाल में जब जिम्बाब्वे दौरे के लिए सैमसन को टीम से बाहर रखे जाने को ‘आराम’ का नाम दिया गया, तब उनका एक पुराना साक्षात्कार फिर चर्चा में आ गया। उसमें सैमसन ने कहा था कि गंभीर ने उनसे कहा था कि ‘अगर तुम 21 बार भी शून्य पर आउट हो जाओगे, तब भी तुम्हें टीम से बाहर नहीं किया जाएगा।’

इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ भारत के 76 रन पर ऑलआउट होने के बाद हुई प्रेस कांफ्रेंस में गंभीर ने कहा कि उनकी सैमसन से बातचीत हुई है, लेकिन उस बातचीत की गोपनीयता बनाए रखने के लिए वह उसका विवरण सार्वजनिक नहीं करेंगे।

हालांकि सवाल यह उठता है कि अगर किसी खिलाड़ी से कहा जाए कि वह खुलकर खेले और लगातार 21 बार शून्य पर आउट होने से भी उसकी जगह सुरक्षित रहेगी, लेकिन टी20 विश्व कप के बाद केवल तीन मैच में असफल रहने पर उसे ‘आराम’ दे दिया जाए, तो क्या उसे विरोधाभासी संकेत नहीं मिलेंगे? यदि सैमसन भ्रमित हैं, तो इसके लिए उन्हें कितना जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?

दूसरा बड़ा सवाल टीम चयन में निरंतरता को लेकर है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के दौरान खेले गए छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों (रद्द हुए मैच सहित) में भारत ने हर बार अलग-अलग अंतिम एकादश उतारी। किसी भी दो मैच में एक जैसी टीम नहीं खेली।

यह भी किसी से छिपा नहीं है कि वनडे टीम को लेकर गंभीर के संबंध विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ बहुत सहज नहीं माने जाते। ऐसे में लगातार हो रहे प्रयोगों ने खिलाड़ियों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा किया है। इससे खिलाड़ी बेखौफ क्रिकेट खेलने के बजाय अपनी जगह बचाने की चिंता में खेलते नजर आ सकते हैं।

तीसरा सवाल गंभीर की उस रणनीति पर है जिसमें वह बल्लेबाजी क्रम को आठवें नंबर तक मजबूत रखने पर जोर देते हैं। इसी क्रम में यह सवाल भी उठ रहा है कि टी20 टीम की मौजूदा योजनाओं में वॉशिंगटन सुंदर की भूमिका क्या है और उन्हें लगातार किस सोच के तहत शामिल किया जा रहा है।

हालांकि इस समय ब्रिटेन में कमेंट्री कर रहे भारत के पूर्व विकेटकीपर दीप दासगुप्ता का मानना है कि टी20 विश्व कप में अभी दो साल बाकी हैं इसलिए गंभीर और टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों के बड़े समूह को परखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए।

दासगुप्ता ने कहा, ‘‘यह निराशाजनक है, लेकिन हमें बड़ी तस्वीर भी देखनी होगी। नए खिलाड़ियों को आजमाने में कोई बुराई नहीं है। ये युवा खिलाड़ी इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों में खेलने के आदी नहीं हैं। वहां की पिचें अलग होती हैं और टी20 खेलने का तरीका भी भारत से अलग है। आईपीएल में पहले छह ओवरों में तेजी से रन बनाना सबसे अहम होता है जबकि इंग्लैंड में पावरप्ले के दौरान विकेट बचाते हुए पारी को संभालना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ’’

भाषा नमिता आनन्द

आनन्द


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