(कुशान सरकार)
नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) जब वैभव सूर्यवंशी ने कुछ समय पहले राजस्थान रॉयल्स के ट्रायल्स में हिस्सा लिया था, तब न तो उनके पास वह जबरदस्त ‘बैक-लिफ्ट’ थी और न ही बल्ले की वह तेज ‘स्पीड’ थी जिसने अब गेंदबाजों की पूरी जमात को बुरे सपनों से परेशान कर दिया है।
लेकिन क्रिकेट की जबरदस्त समझ और बेमिसाल स्पष्टता की वजह से सूर्यवंशी अक्सर जुबिन भरूचा को युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं जिनमें 15 साल की उम्र में ऐसे ही गुण थे।
संभवत: देश के सबसे बेहतरीन आधुनिक बल्लेबाजी मेंटोर में से एक भरूचा ने सूर्यवंशी पर भी काम किया है। उन्होंने सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के पीछे के विज्ञान और उन खासियतों के बारे में बताया जो उन्हें सबसे अलग बनाती हैं।
भरूचा ने पीटीआई से बताया, ‘‘वैभव की एक अनोखी खासियत यह है कि वह खेल के साथ-साथ खुद को भी बेहतर बनाता जाता है। लोग आज जो देखते हैं, वह तब आठ साल का था, तो ऐसा नहीं था। यह जबरदस्त बैक-लिफ्ट धीरे-धीरे तब विकसित हुई, जब उसके आस-पास गेंदबाजी का स्तर और गति बेहतर होती गई। ’’
भरूचा उस समय से रॉयल्स से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2025 के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत से पहले कोचों ने उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ पर कैसे काम किया।
मुंबई के इस पूर्व बल्लेबाज ने बताया, ‘‘दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रायल में उसने हिस्सा लिया था, उस ग्रुप में उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ सबसे तेज नहीं थी। इस बात को पहचाना गया और तीन महीने तक इस पर पूरी लगन से काम किया गया, जिसके बाद हम उनकी बल्ले की ‘स्पीड’ में 30 प्रतिशत तक और सुधार कर पाए। ’’
तो आखिर ऐसी कौन सी बात है जो सूर्यवंशी को उन दूसरे प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाजों से अलग बनाती है, जो इस समय उभरकर सामने आ रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा, ‘‘गेंद को खेलने का फैसला थोड़ा देर से लेने की काबिलियत, यानी समय को एक पल के लिए थाम लेने की क्षमता ही बेहतरीन बल्लेबाजों की सबसे बड़ी पहचान होती है। ’’
अगर आपने सूर्यवंशी को खेलते हुए देखा है, तो आपने पाया होगा कि उनका फुटवर्क (पैरों की हरकत) बहुत कम होता है। वह ज्यादातर एक ही जगह खड़े होकर, बल्ले की जबरदस्त ‘स्पीड’ और ऊंची बैक-लिफ्ट की मदद से गेंद को हिट करता है। लेकिन उसके पिछले पैर में एक हल्की सी हलचल (ट्रिगर) होती है, जिसकी मदद से वह क्रीज की गहराई का पूरा फायदा उठा पाता है।
भरूचा ने कहा, ‘‘इसका बहुत सारा श्रेय उसके बैकफुट पर ‘लोड’ होने और उसके ‘बैक-लिफ्ट’ को जाता है। बैक-लिफ्ट सिर्फ एक स्टाइल की बात नहीं है। जैसे ही गेंद आती है, शरीर, हाथ और आंखें मिलकर एक साथ काम करते हैं ताकि जगह का सही अंदाजा लग सके। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘महान बल्लेबाज सिर्फ गेंद पर प्रतिक्रिया नहीं करते, उन्हें गेंद से कुछ अतिरिक्त जानकारी भी मिलती है। यह सिखाना बहुत मुश्किल है क्योंकि यह नजर, टाइमिंग, संतुलन के मेल से बनता है। ’’
हालांकि वह टीम के सीनियर खिलाड़ियों जैसे रियान पराग और ध्रुव जुरेल के मुकाबले काफी छोटा है, फिर भी उसका ट्रेनिंग रूटीन उनसे अलग नहीं रहा है।
सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में जो बात सबसे ज्यादा नजर आई है, वह है स्कोरिंग के मौकों में बढ़ोतरी। 2025 में उसके स्कोरिंग चार्ट में ऑन-साइड के शॉट का दबदबा था, लेकिन इस एक साल उसने ऑफ-साइड पर भी शॉट्स खेलना सीख लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘शीर्ष स्तर पर बल्लेबाजी का विकास सिर्फ कमजोरियों को दूर करने और दबाव में साफ सोच रखने के बारे में ही नहीं है, बल्कि अपनी रेंज बढ़ाने के बारे में भी है। दिलचस्प बात यह है कि आईपीएल सत्र के बीच उसके अभ्यास करने के रूटीन में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। पिछले कुछ साल से वह लगभग उतनी ही गेंदों पर अभ्यास कर रहा है। ’’
तो सूर्यवंशी में 2025 की तुलना में 2026 में क्या फर्क आया है? इस पर भरूचा ने कहा, ‘‘अब फर्क यह है कि उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है। पहले, उसे पता था कि वह अंडर-19 के गेंदबाजों पर हावी हो सकता है। अब उसे विश्वास है कि वही तरीके, वही रफ्तार अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों के खिलाफ भी काम कर सकते हैं। यह अंदरूनी बदलाव बहुत बड़ा है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिभा खिलाड़ियों को एक सीमा तक पहुंचा सकती है, लेकिन अक्सर उनका विश्वास ही उन्हें असल में उस सीमा तक पहुंचने में मदद करता है। ’’
सूर्यवंशी अभी कामयाबी की ऊंचाइयों पर हैं, लेकिन जाहिर है उनके जीवन में भी उतार-चढ़ाव के दौर आएंगे, जैसा कि हर खिलाड़ी के साथ होता है। उनके बारे में चर्चाएं तेजी से बढ़ेंगी, लेकिन भरूचा का मानना है कि तेंदुलकर के बाद, उन्होंने किसी भी किशोर में इतनी स्पष्टता नहीं देखी है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस लिहाज से, वह मुझे काफी हद तक युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं। जरूरी नहीं कि खेलने के अंदाज में, बल्कि परिपक्वता और सोच की स्पष्टता के मामले में। कुछ खिलाड़ी उम्र में तो कम होते हैं, लेकिन उनकी समझ काफी गहरी होती है। वह भी ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं। ’’
भरूचा ने कहा, ‘‘यह सोचना अवास्तविक होगा कि वह उन मुश्किलों से पूरी तरह बचे रहेंगे, जिनका सामना हर क्रिकेटर को करना पड़ता है। असफलता, कड़ी जांच-परख और उम्मीदों का बोझ, ये ऐसी चीजें हैं जिनसे कोई बच नहीं सकता। ’’
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर