ग्लास्गो, 29 जुलाई (भाषा) भारत की जीवंत संस्कृति और राष्ट्रमंडल परिवार के साथ उसके साझा मूल्यों की झलक दो अगस्त को ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के दौरान ‘हैंडओवर’ खंड में नजर आयेगी जो 2030 में खेलों के शताब्दी संस्करण के मेजबान के तौर पर अहमदाबाद के स्वागत के अंतरराष्ट्रीय उत्सव का हिस्सा होगा ।
भारत के संगीत और नृत्य जगत के कुछ बड़े नाम समापन समारोह में मंच पर दिखेंगे जब राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज अगले मेजबान के तौर पर भारत को सौंपा जायेगा ।
यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार ‘हैंडओवर खंड’ तीन हिस्सों में होगा जो दर्शकों को एक ऐसे सफर पर ले जाएगा जिसमें साझी सोच, संस्कृति और आपसी जुड़ाव का जश्न मनाया जाएगा।
पहले हिस्से में भारत के राष्ट्रगीत वंदेमातरम के 150 साल का जश्न होगा । अभिनेत्री और पूर्व विश्व सुंदरी मानुषी छिल्लर की अगुवाई में नर्तकों का समूह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का परिचय दर्शकों से करायेगा ।
दूसरे हिस्से में भारत के मशहूर सितार वादक ऋषभ रिखिराम शर्मा और स्कॉटलैंड के बेहतरीन पाइपर रोस ऐंसली की जुगलबंदी होगी । आखिर में गुजरात पर विशेष कार्यक्रम होगा जो अगले खेलों का मेजबान है ।
संगीतकार शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम के साथ भारत के कुछ सुपरहिट गाने पेश करेंगे । इसमें गुजरात की भूमि त्रिवेदी भी साथ देंगी ।
ग्लासगो खेल 2026 की मुख्य मार्केटिंग और समारोह अधिकारी लुईसा माहोन ने कहा, ‘यह हैंडओवर सिर्फ एक रस्म या औपचारिकता नहीं है बल्कि यह एक ऐसा नजारा है जो एक मंच पर दो देशों के एक साथ आने की भावना को दिखाता है।’’
उन्होंने कहा ,’वंदेमातरम की ताकत और कविता से लेकर सितार और पाइप्स के बीच अद्भुत संवाद तक और गुजरात की जीवंत संस्कृति को जीवंत करने वाले फिनाले तक, हम ग्लास्गो के दर्शकों को उसकी पहली झलक दिखा रहे हैं जो अहमदाबाद 2030 में होने वाला है। भारत के कुछ सबसे बड़े सितारों का स्कॉटलैंड में पहली बार स्वागत करना और राष्ट्रमंडल खेल को खुशी, रंग और एकता के साथ आगे बढ़ाना सम्मान की बात है।’
ग्लास्गो 2026 में हैंडओवर खंड की समारोह निदेशक और टीसीएम प्लेटफॉर्म की निदेशक चंदा सिंह ने कहा ,‘‘ इस समारोह का हर पल एक मकसद से तैयार किया गया है ..राष्ट्रमंडल परिवार को भारत की गर्मजोशी, ऊर्जा और आशावादिता से रूबरू कराना । हम इस हैंडओवर समारोह के जरिये उस भारत को दिखाना चाहते हैं जो आत्मविश्वास से भरा है और अपनी परंपराओं से जुड़ा हुआ है ।’’
भाषा
मोना सुधीर
सुधीर