हर खिलाड़ी आदर्श बनने की कोशिश करता है, लेकिन इंसान कई बार कसौटी पर खरा नहीं उतरता: गावस्कर
हर खिलाड़ी आदर्श बनने की कोशिश करता है, लेकिन इंसान कई बार कसौटी पर खरा नहीं उतरता: गावस्कर
मुंबई, 24 मई (भाषा) भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने रविवार को कहा कि हर खिलाड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचने के दौरान खुद को एक आदर्श के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है, लेकिन इंसान होने के नाते कई बार वह उन मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाता।
इस वर्ष के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में हुई किसी विशेष घटना का उल्लेख किए बिना गावस्कर ने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी घटना या संदेश को आम लोगों तक पहुंचने में अब पहले की तुलना में बहुत कम समय लगता है।
गावस्कर ने रविवार को यहां ‘मिडविकेट स्टोरीज’ के लॉन्च के अवसर पर पत्रकारों से कहा, ‘‘ भावनाओं के उफान में कई बार चीजें हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि आप युवाओं को कुछ गलत सिखा रहे हैं। कोई भी व्यक्ति अचानक अपना आपा खो सकता है और यही होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई सफलता हासिल करने लगता है तो सबसे अच्छा रोल मॉडल (आदर्श) बनने की कोशिश करता है। हमें उसी तरह की परवरिश मिली होती है। आप चाहते हैं कि लोग आपको आदर्श मानें। लेकिन हम सभी इंसान हैं और कभी न कभी हम उस स्तर पर खरे उतरने में असफल हो सकते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आज के समय में ऐसी बातें बहुत जल्दी सार्वजनिक हो जाती हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था।’’
गावस्कर ने अपने खेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस दौर में टेस्ट मैच के एक दिन का खेल समाप्त होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी साथ बैठकर बातचीत और मेलजोल किया करते थे। उन्होंने इसकी तुलना आईपीएल मैचों के बाद खिलाड़ियों के आपसी संवाद से की।
उन्होंने कहा, “जब हम खेलते थे तब एक परंपरा हुआ करती थी। जिस टीम की उस दिन बल्लेबाजी होती थी, वह दूसरी टीम के ड्रेसिंग रूम में पानी की बोतलें लेकर जाती थी।’’
उन्होंने बताया, ‘‘ दिन का खेल खत्म होने के बाद करीब 20 मिनट का समय खिलाड़ियों को शांत होने के लिए दिया जाता था। फिर पूरे दिन के खेल पर चर्चा होती थी। हमारी 16 खिलाड़ियों की टीम में से लगभग 10-12 खिलाड़ी विपक्षी टीम के कमरे में जाकर उनके साथ बैठते थे।’’
गावस्कर ने कहा कि उन बातचीतों में सिर्फ मैच की बातें नहीं होती थीं, बल्कि खिलाड़ी एक-दूसरे से स्थानीय जगहों, खाने-पीने और फिल्मों के बारे में भी जानकारी लेते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैच की घटनाओं पर चर्चा तो होती ही थी, लेकिन अगर आप विदेशी दौरे पर होते थे तो आप उनसे पूछते थे कि यहां खाने के लिए अच्छी जगहें कौन-सी हैं, कौन-सी फिल्में देखनी चाहिए।’’
उन्होंने आईपीएल के मौजूदा माहौल की सराहना करते हुए कहा, ‘‘आप आईपीएल में भी देखते हैं कि मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे से मिलते हैं और बातचीत करते हैं। मेरा मानना है कि हाथ मिलाने और आपसी सम्मान दिखाने की यह नई परंपरा काफी अच्छी है।’’
भाषा
आनन्द पंत
पंत

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