डल झील से कर्तव्य पथ तक: कयाक खिलाड़ी मोहसिन अली और उनकी कोच बिलकिस मीर के जज्बे की दास्तां

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डल झील से कर्तव्य पथ तक: कयाक खिलाड़ी मोहसिन अली और उनकी कोच बिलकिस मीर के जज्बे की दास्तां

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 03:37 PM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 03:37 PM IST

(पूनम मेहरा)

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) कयाक खिलाड़ी मोहसिन अली अपनी कोच बिलकीस मीर की मदद से श्रीनगर में इस खेल को बनाए रखने के लिए परेशानियों से डटकर सामना करने में जुटे हैं और अब वह गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में जम्मू-कश्मीर की झांकी में दिखाई देंगे।

मोहसिन लगभग सात साल के थे जब उन्होंने तय कर लिया था कि डल झील में उनका भविष्य शिकारे का चप्पू नहीं, बल्कि कयाक का पैडल तय करेगा।

एक दशक बाद अपनी पथप्रदर्शक कोच बिलकीस मीर के सहयोग 18 वर्षीय मोहसिन सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इस 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर नजर आएंगे।

श्रीनगर के कंद मोहल्ले के मोहसिन परेड में जम्मू-कश्मीर की झांकी का हिस्सा होंगे। यह केंद्र शासित प्रदेश की पहचान अब तक मुख्यत: पर्यटन के इर्द गिर्द रही है लेकिन अब यह खेल की छाप छोड़ेगा।

मोहसिन 2018 से सक्रिय प्रतियोगी रहे हैं लेकिन पिछले साल उन्होंने ‘खेलो इंडिया वाटर गेम्स’ में पुरुषों की 1000 मीटर कयाकिंग रेस में स्वर्ण पदक जीतकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया जो उनके लिए बड़ा पल था।

उन्होंने पीटीआई से फोन पर बातचीत में कहा, ‘‘मैं अपने परिवार का पहला खिलाड़ी हूं और मेरा एक ही सपना है कि किसी दिन ओलंपिक पदक के साथ देश को गौरवान्वित करूं। अब तक अपने करियर में 17 पदक जीत चुका हूं। ’’

उन्होंने अपने उस बड़े पल का बेसब्री से इंतजार करते हुए कहा कि सोमवार का दिन उनके लिए उतना ही खास होगा जितना उनका पिछले साल ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी के साथ पांच मिनट की बातचीत के दौरान खुशी महसूस करना था।

मोहसिन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री से बातचीत ने मुझे यहां श्रीनगर में मशहूर कर दिया। जब मैं शिकारा निकालता हूं, लोग मुझे पहचान लेते हैं। ’’

उन्होंने बताया कि उन्होंने स्कूली पढ़ाई पूरी कर ली है और अब अप्रैल में होने वाली विश्व चैंपियनशिप की ट्रायल्स की तैयारी के लिए उत्तराखंड के कोटेश्वर स्थित एक अकादमी में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

परिवार को चलाने के लिए छोटी-मोटी नौकरियां करने के बावजूद मोहसिन के पिता की उनकी खेल की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने अहम भूमिका रही है।

लेकिन मोहसिन अपनी कोच बिलकिस मीर के प्रति बहुत आभारी हैं जो पूर्व कयाक खिलाड़ी रही हैं। मीर सिर्फ एक राष्ट्रीय कोच (जूनियर और सीनियर दोनों) ही नहीं बनीं बल्कि एक तकनीकी अधिकारी भी बनीं।

वह 2024 के पेरिस ओलंपिक में कैनोइंग/कयाकिंग जज बनने वाली पहली भारतीय बनीं और 2012 के लंदन ओलंपिक में भारतीय महिला टीम की राष्ट्रीय कोच थीं।

मोहसिन ने कहा, ‘‘वह शुरू से ही मेरे साथ रही हैं और उनके सहयोग के बिना मैं यहां तक ​​नहीं पहुंच पाता।

अड़तीस साल की मीर श्रीनगर की हैं, उन्होंने कहा कि मोहसिन के जरिए वह ओलंपिक का सपना पूरा करने की उम्मीद कर रही हैं क्योंकि सक्रिय खिलाड़ी के तौर पर वह इससे महरूम रह गईं।

मीर ने कहा, ‘‘मैं मोहसिन को तब से ट्रेनिंग दे रही हूं जब वह छह या सात साल का था। इस लड़के ने बहुत संघर्ष किया है और उसने यह सब मुस्कुराते हुए किया है। मैंने उसे आगे बढ़ाने में पूरी कोशिश की है और मैं उसे अपने बच्चे जैसा मानती हूं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब वह चोटों से परेशान था और पुराने उपकरणों की मुश्किलातों से जूझ रहा था तो मैंने उसके साथ रहने की कोशिश की। कश्मीर का मौसम भी बहुत खराब हो सकता है और यह एक कयाकर के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। ’’

मीर ने कहा, ‘‘लोग जो देखते हैं वह पदक है, उन्हें कोई अंदाजा नहीं है कि उस पदक के लिए कितनी मेहनत लगती है। सिर्फ एथलीट और उसके कोच को ही वहां तक ​​पहुंचने के संघर्ष के बारे में पता होता है और मैं मोहसिन के लिए बहुत खुश हूं। उसकी सफलता मुझे अपनी लगती है। ’’

जब उनसे चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताने के लिए कहा गया तो मीर ने सबसे शुरूआती चीज यानी ‘डाइट’ पर बात की। उन्होंने कहा, ‘‘आप जानते हैं कि कश्मीरी नाश्ते में ज्यादातर कंद्रू रोटी (पारंपरिक रोटी) और ‘नून चाय’ (नमकीन चाय) होती है। यह एक उभरते हुए एथलीट के लिए कभी भी काफी नहीं हो सकता। हमें इन बेसिक चीजों को बदलने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी है। ’’

मीर ने खुद भी कई संघर्षों का सामना किया है जिसकी शुरुआत 1998 में हुई जब राज्य में आतंकवाद चरम पर था। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने एक कयाक खिलाड़ी के तौर पर शुरुआत की थी तो मुझसे कहा गया था कि ‘ये लड़की कश्मीर का नाम खराब करेगी’। मुझे भी बहुत कुछ सुनना पड़ा, मेरे माता-पिता को भी, लेकिन अल्लाह मेरे साथ था। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘और अब जब यह बच्चा गर्व से कहता है कि मैं उसकी कोच हूं तो सोचिए इसका क्या मतलब है। पुरुष प्रधान समाज में, उसे मुझे स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं है और मुझे लगता है कि यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत में से एक है। ’’

मीर भी मोहसिन के साथ दिल्ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि पिछले साल मोदी की मोहसिन से बातचीत के बाद श्रीनगर में उनकी छोटी सी अकादमी में एडमिशन की पूछताछ की बाढ़ सी आ गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की मोहसिन से रेडियो पर बातचीत के बाद 100 से ज्यादा पूछताछ हुई। मेरे पास इतने लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए बुनियादी ढांचा भी नहीं है, लेकिन मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि मोहसिन की जीत ने दूसरे युवाओं को प्रेरित किया। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘कैनोइंग/कयाकिंग में 15 से ज्यादा ओलंपिक पदक मिलते हैं। जरा सोचिए कि अगर हम इस एक खेल में अच्छा करें तो ओलंपिक रैंकिंग में हम कहां होंगे। ’’

भाषा नमिता पंत

पंत