कोलकाता, एक सितंबर (भाषा) अच्छे दिन आए, बुरे दिन भी आए और फिर एक ऐसा बदनाम दिन भी आया जिसे कोलकाता शायद भूल जाना चाहेगा। इन सबके बीच लियोनेल मेस्सी किसी ना किसी तरह इस शहर के फुटबॉल प्रेम के करीब बने रहे।
अर्जेंटीना के इस सुपरस्टार की अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए हैं और कोलकाता में ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कुछ हाथ से फिसल रहा है।
मेस्सी इस शहर के लिए कभी सिर्फ एक और सुपरस्टार नहीं रहे जो आए, खेले और चले गए।
मेस्सी के पहली बार सॉल्ट लेक स्टेडियम में कदम रखने के भी अब ठीक 15 साल हो गए हैं। दो सितंबर की उस शाम शुरू हुआ 90 मिनट का जादू गहरे जुनून में बदल गया, वर्षों की दूरी के बावजूद यह जुनून कायम रहा और आखिरकार पिछले साल एक कड़वे अनुभव में बदल गया।
मेस्सी से पहले डिएगो माराडोना थे। माराडोना से पहले पेले थे जो 1977 में न्यूयॉर्क कॉसमॉस की ओर से कोलकाता में खेले थे।
लेकिन मेस्सी ने अपना अलग ही जुनून पैदा किया।
बिप्लब पोद्दार से लेकर युवा प्रशंसक सौमिंद्र घोष तक सभी की भावना एक जैसी है कि कोलकाता ने मेस्सी को पर्याप्त नहीं देखा। पोद्दार 2011 में सॉल्ट लेक स्टेडियम में उस समय सहायक रेफरी थे जब मेस्सी ने पहली बार अर्जेंटीना के कप्तान के रूप में मैदान में कदम रखा था। वहीं घोष ने सिविल इंजीनियरिंग छोड़कर मेस्सी की थीम पर कैफे शुरू किया और पिछले साल मेस्सी की दूसरी भारत यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात भी की।
पंद्रह साल पहले अगस्त की एक बारिश भरी शाम गुवाहाटी में बिप्लब पोद्दार को एक ऐसा पत्र मिला था जिसे वह आज भी अपनी जिंदगी का सबसे अच्छा पत्र बताते हैं।
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने उन्हें सॉल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना और वेनेजुएला के बीच होने वाले दोस्ताना मुकाबले के लिए सहायक रेफरी नियुक्त किया था।
पोद्दार ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह गोल्डन बॉल मिलने जैसा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा फोन लगातार बज रहा था। मेरे मोहल्ले के लोग मुझे माला पहना रहे थे और ऑटोग्राफ लेने के लिए तरह-तरह के अनुरोध भेज रहे थे। मैं अपनी जिंदगी के उन तीन-चार दिनों पर विश्वास ही नहीं कर पा रहा था।’’
कोलकाता के प्रशंसकों के लिए मेस्सी के संन्यास का ‘बुरा’ पक्ष यह एहसास है कि एक पूरी पीढ़ी का उनसे जुड़ाव अब खत्म होने की ओर है।
मेस्सी की थीम पर बने ‘दम दम लियो कैफे’ के मालिक सौमिंद्र घोष ने अर्जेंटीना के इस खिलाड़ी के प्रति अपनी दीवानगी को वर्षों से जीवनशैली में बदल दिया है। वह 2008 से मेस्सी के प्रशंसक रहे हैं। उनके कैफे में मेस्सी के करियर के कई यादगार पलों की तस्वीरें हैं, मैच दिखाए जाते हैं और मेन्यू में भी उनके खेल से जुड़े नाम शामिल हैं।
घोष ने पिछले साल मेस्सी के ‘गोट टूर’ (ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम टूर) के दौरान उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने मेस्सी को एक तस्वीर भेंट की थी जिस पर इस स्टार खिलाड़ी ने अंगूठा उठाकर प्रतिक्रिया दी थी। मेस्सी ने प्रशंसकों के एक कार्यक्रम में उनके साथ समूह में तस्वीर भी खिंचवाई थी।
घोष ने कहा, ‘‘मेरे स्टाफ के सदस्य भी मेरे से अधिक दुखी हैं। मैंने उनसे कहा, ‘देखो, यह जिंदगी का हिस्सा है। हर चीज का अंत होता है’।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता था कि यह दिन एक ना एक दिन आएगा। मैंने मेस्सी को खेलते हुए देखते हुए कई साल बिताए हैं… दुख में उनके साथ रहा, खुशी में उनके साथ रहा, यह वास्तव में शानदार सफर था। जाहिर तौर पर अर्जेंटीना की जर्सी से उन्हें संन्यास लेते देखना बुरा लग रहा है।’’
लेकिन कोलकाता की मेस्सी कहानी में एक ऐसा अध्याय भी है जिसे शहर भुलाना चाहेगा।
पिछले साल 13 दिसंबर को मेस्सी सॉल्ट लेक स्टेडियम लौटे थे। उम्मीदें बहुत बड़ी थीं। वीआईपी रोड पर 70 फुट ऊंची प्रतिमा, सेलिब्रिटी मैच, खचाखच भरे स्टैंड और दर्शकों में शाहरुख खान की मौजूदगी ने माहौल को खास बना दिया था।
कोलकाता और देश के दूसरे हिस्सों से हजारों लोग पहुंचे थे। कई प्रशंसकों ने मेस्सी की एक झलक पाने के लिए 14,000 रुपये तक खर्च किए थे।
जो आयोजन जिंदगी भर याद रहने वाला जश्न होना चाहिए था वह भारतीय खेलों के सबसे कड़वे दिनों में बदल गया।
मेस्सी सुबह करीब 11.30 बजे लुई सुआरेज और रोड्रिगो डी पॉल के साथ पहुंचे लेकिन नेताओं और अन्य गणमान्य लोगों से घिरे मेस्सी को हजारों टिकटधारी प्रशंसक ठीक से देख भी नहीं सके। सुरक्षा कारणों से वह जल्द ही वहां से निकल गए।
गुस्सा तेजी से अराजकता में बदल गया। प्रशंसकों ने गेट और कुर्सियां तोड़ दीं और मैदान पर सामान फेंका जिससे सॉल्ट लेक स्टेडियम युद्धक्षेत्र जैसा नजर आने लगा।
कोलकाता के लिए शर्मिंदगी इसलिए भी अधिक थी क्योंकि मेस्सी के ‘गोट टूर’ के हैदराबाद, मुंबई और नयी दिल्ली में हुए अन्य कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे।
भाषा सुधीर आनन्द
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