जम्मू, 28 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीतने के बाद खिलाड़ियों के परिवारों, युवा क्रिकेटरों और पूर्व खिलाड़ियों ने जश्न बनाते हुए इसे सामूहिक फक्र का पल बताया।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के मुख्यालय में क्रिकेट के दीवानों की भीड़ उमड़ पड़ी जो लंबे समय के इंतजार के बाद मिली जीत का जश्न मनाने के लिए जमा हुई।
खिलाड़ियों के परिवारों ने मिठाइयां बांटी, गले मिले और शुभचिंतकों का अभिवादन किया जबकि पड़ोसी और रिश्तेदार इस ऐतिहासिक पल को मनाने के लिए उनके घरों में जमा हुए।
दाएं हाथ के गेंदबाज युद्धवीर सिंह की बड़ी बहन प्रीति चरक ने इस जीत को जबरदस्त बताते हुए कहा, ‘‘यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इन खिलाड़ियों का समर्थन किया जिसमें कोच, परिवार और पूरी समुदाय शामिल है। हम इतने प्यार के लिए शुक्रगुजार हैं। ’’
पेशे से वकील प्रीति ने कहा, ‘‘67 साल में यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर ने खिताब जीता। हमें हमेशा विश्वास था कि टीम ट्रॉफी उठाएगी। हम उनसे कहते रहते थे, ‘तुम जीतोगे’। ’’
शुरुआती दिनों को याद करते हुए चरक ने कहा कि नौकरी की चिंताओं के बावजूद उनका भाई क्रिकेट में आगे बढ़ने के अपने सपने पर अड़ा रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘पापा चाहते थे कि वह करियर बनाए, यहां तक कि सेना में शामिल हो। लेकिन वह बस क्रिकेटर बनना चाहता था। आखिरकार, हमने उसे पूरा सपोर्ट दिया।’
प्रीति ने उसकी शुरुआती मुश्किलों के बारे में भी बताया जिसमें दस्तावेजों में देरी के कारण अंडर-19 का मौका चूकना भी शामिल था। हालांकि उसने कुछ साल पहले मुंबई के खिलाफ मैच में पांच विकेट लेकर जोरदार वापसी की।
उन्होंने कहा, ‘‘उस दिन से, हमें पता था कि उसमें प्रतिभा है। ’’
पूर्व रणजी खिलाड़ी जतिन वधावन ने इस मौके को केंद्र शासित प्रदेश में क्रिकेट के लिए एक अहम पल बताया। वधावन जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज कन्हैया के बड़े भाई भी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने भी अपने समय में इसका सपना देखा था। तब यह पूरा नहीं हुआ हो, लेकिन आज यह हकीकत बन गया है। ’’
लॉन में जश्न में शामिल हुए उभरते क्रिकेटर सिकंदर ने कहा, ‘‘अगर वे कर सकते हैं, तो हम भी कर सकते हैं। यह जीत साबित करती है कि जम्मू और कश्मीर की प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकती है। ’’
अखनूर के कथहर गांव में गेंदबाज सुनील कुमार का घर है। जीत की खबर फैलते ही लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए, ढोल बजाए और परिवार के साथ जश्न मनाया। गांव में जश्न का माहौल था, स्थानीय लोगों ने इस जीत को पूरे इलाके के लिए गर्व का पल बताया।
सुनील की मां रेखा देवी ने कहा कि उन्हें हमेशा से विश्वास था कि उनका बेटा परिवार को गर्व महसूस कराएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘एक दिन मेरा बेटा भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। हम बहुत खुश हैं और उन सभी के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने उसका साथ दिया। ’’
उनके पिता राम लाल वर्मा ने कहा, ‘‘मेरे बेटे ने हमें गर्व महसूस कराया है। उसने बचपन से बल्ले और गेंद के अलावा कभी कोई खिलौना नहीं छुआ। मेरा आशीर्वाद उसके और पूरी टीम के साथ है। ’’
भाषा नमिता आनन्द
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