समद ने छह साल बाद अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कर्नाटक के खिलाफ यादगार शानदार वापसी की

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समद ने छह साल बाद अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी कर्नाटक के खिलाफ यादगार शानदार वापसी की

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  • Publish Date - February 28, 2026 / 08:39 PM IST,
    Updated On - February 28, 2026 / 08:39 PM IST

… जी उन्नीकृष्णन …

हुबली, 28 फरवरी (भाषा) छह साल पहले, 18 वर्षीय अब्दुल समद ड्रेसिंग रूम में बेहद निराश बैठे थे क्योंकि वह रणजी ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में कर्नाटक के खिलाफ जम्मू और कश्मीर को पहली पारी की महत्वपूर्ण बढ़त के लिए आवश्यक 15 रन बनाने में नाकाम रहे थे। तब 50 गेंदों में 43 रन की शानदार बल्लेबाजी के बाद समद ने बाएं हाथ के स्पिनर जे सुचित को एक आसान कैच दे दिया, जिससे जम्मू और कश्मीर पहली पारी में 192 रन पर आठवां विकेट गिरा था। कर्नाटक ने अपनी पहली पारी में 206 रन बनाए और शेष दो विकेट भी उतने ही स्कोर पर लेकर 14 रन की बढ़त हासिल कर ली। पहली पारी में बढ़त सुनिश्चित करने क बाद कर्नाटक ने इस मैच को 167 रन से जीत कर सेमीफाइनल का टिकट कटाया था। समद उस दिन को नहीं भूले हैं। कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में जम्मू-कश्मीर की पहली में 104 गेंदों पर 61 रन बनाने वाले समद ने पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे वह मैच अच्छी तरह याद है, बिल्कुल सटीक रूप से कहूं तो, उस समय मैं बल्लेबाजी कर रहा था। हमें 14 रन बनाने थे। मुझे उस मैच का अफसोस है, मुझे लगता है कि वह 2020 में हुआ था और पहली पारी में बढ़त मिलने से हमें क्वालीफाई करने में मदद मिलती, लेकिन मैं उस समय आउट हो गया।’’ समद ने कहा, ‘‘उस आउट होने का दर्द मुझे लंबे समय तक सताता रहा, क्योंकि मैं एक छोटा बच्चा था। मुझे लगता है कि यह जीत उस दिन के दर्द को कम कर देगी।’’ समद को हालांकि उस अनुभव से काफी सीख मिली। उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने जब पदार्पण किया था तब मैं 18 साल का था और मुझे लगता है कि इससे मुझे काफी सीख मिली। मैं अब परिपक्व भी हो रहा हूं। अब मैं 24 साल का हूं, इसलिए एक बल्लेबाज के रूप में मैं दिन-प्रतिदिन समझदार हो रहा हूं और उस आउट होने ने मुझे अपने विकेट की कीमत समझना सिखाया।’’ आम तौर पर सीमित ओवरों के बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाने वाले समद ने कड़ी मेहनत करते हुए 10 मैचों में 57 के औसत से 748 रन बनाए, जिसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ इस सत्र में मैंने अपने खेल का लुत्फ उठाने के लिए मैच की परिस्थितियों को ध्यान में रख कर अभ्यास किया था। यह मेरे लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ।’’ गले में चमकता हुआ विजेता पदक पहने समद अब राहत महसूस कर रहे हैं और उन्हें व्यक्तिगत असफलता के विचारों से कोई परेशानी नहीं होती। समद ने टीम की इस सफलता का श्रेय गेंदबाजों के साथ कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा को दिया। भाषा आनन्द नमितानमिता