… जी उन्नीकृष्णन…
हुबली, 28 फरवरी (भाषा) मुख्य कोच अजय शर्मा ने शनिवार को कहा कि रणजी ट्रॉफी की जीत ने जम्मू-कश्मीर को नए क्रिकेट नायकों को खोजने में मदद की है क्योंकि मुंबई या दिल्ली जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ खेलते समय उनकी कमी खलती थी। शर्मा की टीम ने आठ बार की चैंपियन कर्नाटक को 291 रनों की पहली पारी की बढ़त के दम पर हराकर घरेलू क्रिकेट के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपना पहला खिताब जीता। शर्मा ने मैच के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘ यह टीम, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) और जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण है। यह एक सपने के सच होने जैसा है। यह एक लंबा सफर रहा है और हम बहुत खुश हैं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि हम रणजी ट्रॉफी जीत सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ जब आप दूसरी टीमों के खिलाफ खेलते हैं, तो उन्हें हराना बहुत मुश्किल होता है। जिस तरह से उन्होंने मुंबई, दिल्ली, बंगाल, मध्य प्रदेश, हैदराबाद, राजस्थान जैसे पूर्व चैंपियन के खिलाफ खेला वह शानदार था। उन टीमों में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी भी थे। हमारे पास उनके जैसा कोई नायक नहीं था, लेकिन आज हर कोई नायक बन गया है।’’ शर्मा ने कहा, ‘‘ जिन खिलाड़ियों ने अपना योगदान दिया है, अब वे नायक बन गए हैं। ये खिलाड़ी पहले सोचते थे कि आईपीएल खेलना बड़ी बात है लेकिन जब आप यह ट्रॉफी जीतते हैं तो आपकी किस्मत खुल जाती है। अब आपकी कोई सीमा नहीं है। अब वे इस ट्रॉफी का महत्व समझते हैं। ’’ फाइनल से पहले जम्मू-कश्मीर को कुछ मुश्किल समय का सामना करना पड़ा क्योंकि शानदार फॉर्म में चल रहे शुभम खजूरिया और वंशराज शर्मा को चोट के कारण बेंच पर बैठना पड़ा। जम्मू-कश्मीर को कामरान इकबाल और विवरंत शर्मा के रूप में शानदार विकल्प मिला। उन्होंने विस्तार से बताया, ‘‘मैच से एक दिन पहले, हमारे दो मुख्य खिलाड़ी, लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले शुभम और वंशराज चोटिल हो गए। हम असमंजस में थे कि क्या करें। लेकिन अंत में, हमें विवरंत और इकबाल को टीम में शामिल करना पड़ा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इकबाल… इस खिलाड़ी को सलाम। उन्हें रात 11:30 बजे उड़ान भरनी थी और वे सुबह छह बजे यहां पहुंचे। उन्होंने दूसरी पारी में टीम के लिए अपनी क्षमता का परिचय दिया। वह मैच विजेता खिलाड़ी हैं। उनकी अपनी शैली है, लेकिन वह हमेशा हमारे लिए कारगर साबित होती है।” शर्मा ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अब उनके परिवार ने उन्हें कोच के रूप में स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं भी बहुत भावुक हूं। मैं उनके लिए बहुत खुश हूं। अब वे मुझे कोच कहने लगे हैं। मनन (अजय शर्मा का बेटा) संन्यास लेने से पहले दिल्ली के लिए खेलता था। अब वह मुझे कोच कहता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे अपने परिवार का भी पूरा साथ मिला है। जब आप सात-आठ महीने घर से दूर रहते हैं तो आपको अपने परिवार से पूरा सहयोग मिलता है। मेरे दोनों बेटे, निपुण, मनन, अंचल, मेरी बहू, मेरी पत्नी, मेरी मां, सभी ने मेरा साथ दिया।’’ कर्नाटक के कोच येरे गौड अपनी टीम को फाइनल में मिली निराशा से थोड़े दुखी दिखे। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें पहली पारी में जम्मू-कश्मीर को 400 रन के आसपास रोक देना चाहिये था। बल्लेबाजी करते समय हमने दो ओवरों के अंतराल में दो विकेट गंवा दिए, जिससे मैच का रुख बदल गया। विकेट की स्थिति को देखते हुए, शायद 584 का लक्ष्य हासिल करना संभव था।’’ कर्नाटक के इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा कि खिताब न जीतने के बावजूद इस सत्र में कई सकारात्मक पहलू भी रहे। उन्होंने कहा, ‘‘ स्मरण इस सत्र में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे हैं। पंजाब के खिलाफ 215 रनों का पीछा करते हुए 28 ओवरों में हमने लक्ष्य का पीछा किया। मुंबई के खिलाफ मुंबई में 325 रनों का पीछा करते हुए चौथे दिन जीत हासिल करना भी शानदार था। भाषा आनन्द नमितानमिता