(अमनप्रीत सिंह)
लखनऊ, 31 मई (भाषा) भारत के नए पुरुषों के फ्रीस्टाइल कुश्ती कोच शाको बेंटिनिडिस का मानना है कि मौजूदा अंडर-23 विश्व चैंपियन सुजीत कलकल में ओलंपिक पदक जीतने की क्षमता है, लेकिन 65 किग्रा वर्ग की कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपना दबदबा बनाने के लिए उन्हें अपने तकनीकी कौशल को और निखारना होगा।
उन्होंने भारतीय कोचों से भी आग्रह किया कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण तरीकों और खेल में बदलते रणनीतिक रुझानों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करके लगातार खुद को बेहतर बनाते रहें।
ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया के साथ चार साल के सफल कार्यकाल के बाद भारत लौटे इस जॉर्जियाई कोच ने यह साफ कर दिया कि उनका लक्ष्य सिर्फ बड़े टूर्नामेंट के लिए बेहतरीन पहलवानों को तैयार करने तक ही सीमित नहीं है।
भारतीय संस्कृति से अच्छी तरह परिचित बेंटिनिडिस शनिवार को लखनऊ में राष्ट्रीय शिविर में शामिल हुए और तुरंत ही अपने काम में जुट गए। उन्होंने एशियाई खेलों के लिए हो रहे ट्रायल देखे।
वह भारतीय कोचों के बीच लगातार सीखने की संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इन कोचों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण तरीकों और विश्व कुश्ती में बदलते रणनीतिक रुझानों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने की जरूरत है।
बेंटिनिडिस ने बजरंग को उनके करियर के सबसे सफल दौर में मार्गदर्शन दिया था। वह सुजीत को भारत की 65 किग्रा वर्ग की समृद्ध परंपरा का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानते हैं, जिस परंपरा में पहले सुशील कुमार और बजरंग जैसे दिग्गज पहलवान शामिल रहे हैं।
देश के शीर्ष 65 किब्रा वर्ग के पहलवान का आकलन करते हुए बेंटिनिडिस ने कहा, ‘‘पहले सुशील कुमार थे, फिर बजरंग और अब सुजीत। ’’
दूसरी जगहों पर अवसर होने के बावजूद भारत लौटे बेंटिनिडिस ने बताया कि उनका यह फैसला कुछ अधूरे कामों को पूरा करने की इच्छा और देश की कुश्ती में मौजूद अपार संभावनाओं पर उनके विश्वास से प्रेरित था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भारतीय कुश्ती से बहुत प्यार है और हमने पहले जो कुछ भी हासिल किया है, उस पर मुझे गर्व है। यह मेरे करियर का अगला पड़ाव है और मेरा मानना है कि भारतीय कुश्ती और भी ऊंचे मुकाम तक पहुंच सकती है। ’’
सुजीत की उपलब्धियों में अंडर-23 विश्व खिताब और रैंकिंग सीरीज प्रतियोगिताओं में मिली जीत शामिल है। उनकी तारीफ़ करते हुए भी कोच ने आगाह किया कि ओलंपिक से पहले मिली इस सफलता को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘सुजीत ने रैंकिंग सीरीज टूर्नामेंट जीते हैं और अंडर-23 स्तर पर वह विश्व चैंपियन भी हैं। लेकिन ओलंपिक खेल बिल्कुल अलग होते हैं। ओलंपिक में सिर्फ कुश्ती ही मायने नहीं रखती, बल्कि वहां मनोविज्ञान, तैयारी और दबाव को संभालने की क्षमता भी उतनी ही अहम होती है। ’’
अपने सालों के अंतरराष्ट्रीय अनुभव का हवाला देते हुए बेंटिनिडिस ने बताया कि कई बार के विश्व चैंपियन भी तैयारी में हुई गलतियों की वजह से ओलंपिक पदक जीतने में नाकाम रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वजन प्रबंधन को लेकर एक गलत फैसला, ट्रेनिंग का एक खराब दौर, मुकाबले से ठीक पहले के दिनों में एक छोटी सी गलती से आपका ओलंपिक पदक जीतने का सपना टूट सकता है। हर छोटी से छोटी बात मायने रखती है। ’’
भाषा नमिता आनन्द
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