यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है लेकिन 2028 ओलंपिक के लिए प्रयास जारी रखूंगा: प्रणय

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यह मेरा आखिरी एशियाई खेल हो सकता है लेकिन 2028 ओलंपिक के लिए प्रयास जारी रखूंगा: प्रणय

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 02:44 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 02:44 PM IST

… अंकित श्रेष्ठ …

नागोया, 19 सितंबर (भाषा) अनुभवी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी एच.एस. प्रणय ने संकेत दिया है कि आइची-नागोया एशियाई खेल उनके करियर के आखिरी एशियाई खेल हो सकते हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक तक अपने खेल को जारी रख सकेंगे। प्रणय अगले एक से डेढ़ साल तक खुद को परखेंगे और इसके बाद तय करेंगे कि उनमें ओलंपिक के लिए प्रतिस्पर्धी स्तर बनाए रखने की क्षमता है या नहीं। पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाले प्रणय 20 सदस्यीय भारतीय बैडमिंटन टीम का हिस्सा हैं। 20वें एशियाई खेलों में बैडमिंटन प्रतियोगिता की शुरुआत रविवार से टीम स्पर्धाओं के साथ होगी। प्रणय ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘यह संभवतः मेरे आखिरी एशियाई खेल होंगे। मुझे नहीं लगता कि मैं चार साल बाद इसी स्तर पर खेल पाऊंगा। मैं सिर्फ शीर्ष स्तर पर खेलना चाहता हूं, इससे नीचे नहीं।’’ पिछले सप्ताह वियतनाम ओपन में हिस्सा लेने वाले प्रणय ने कहा कि वह शारीरिक और मानसिक रूप से अच्छी स्थिति में हैं और महाद्वीपीय खेलों के इस बड़े मंच पर अच्छे प्रदर्शन के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं शारीरिक और मानसिक रूप से अच्छी स्थिति में हूं। मैंने पिछले सप्ताह वियतनाम ओपन खेला और कुछ समय के अंतराल बाद अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहा।’’ हांगझोउ एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे प्रणय ने कहा कि पिछली बार स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से चूकना इस बार टीम के लिए प्रेरणा का काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘पिछली बार हम स्वर्ण पदक से बस थोड़े अंतर से चूक गए थे। उम्मीद है कि इस बार हम फाइनल तक पहुंचेंगे और स्वर्ण जीतेंगे।’’ पूर्व विश्व नंबर छह प्रणय ने हालांकि लॉस एंजिलिस ओलंपिक का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है। उनका कहना है कि अगर वह प्रतिस्पर्धी बने रह सकते हैं तो वह 2028 ओलंपिक के लिए प्रयास जारी रखेंगे। प्रणय ने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य लॉस एंजिलिस 2028 है। मैं अगले एक से डेढ़ साल तक प्रयास करूंगा। अगर मुझे लगा कि लॉस एंजिलिस पहुंचने का वास्तविक मौका है, तो मैं खेलना जारी रखूंगा। ’’ भाषा आनन्द पंतपंत