छत्तीसगढ़ भाजपा ने साल 2003 और 2008 विधानसभा चुनाव में शिक्षाकर्मियों की मांगों को प्रमुखता से अपने घोषणा पत्र में जगह दी थी, लेकिन आज तक शिक्षाकर्मी अपनी मांगों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं।
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चुनावी साल में शिक्षाकर्मियों की संविलियन की मांग ने मुसीबत और बढ़ा दी है। इस मुद्दे को भुनाने में कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी पीछे नहीं हैं। दोनों पार्टियां इस मुद्दे को घोषणापत्र में शामिल करने की बात कह रही हैं।
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सरकार ने शिक्षाकर्मियों की मांग पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट अगले कुछ महीनों में आएगी, लेकिन शिक्षाकर्मियों को सभी मांगें पूरा होने का भरोसा नहीं है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई है, साथ ही विपक्ष पर भी निशाना साधा है।
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राज्य में शिक्षाकर्मियों की संख्या करीब 2 लाख है और वे ठोस निर्णय चाहते हैं। वहीं कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी इस मुद्दे पर सियासी नफा देख रहे हैं। ज़ाहिर है, चुनावी साल में सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।
वेब डेस्क, IBC24