नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि किसी महिला के कपड़े उतारने या नहाने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने को लेकर धमकाना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी का अपराध है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भादंसं की धारा 506 के भाग 2 के तहत एक महिला के स्नान करने के वीडियो को फेसबुक पर अपलोड करने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने कहा, “हमारा मत है कि महिलाओं की यौनिकता के बदलते दृष्टिकोण के मद्देनजर, जब पीड़िता स्नान कर रही थी, उसके नग्न अवस्था में वीडियो रिकॉर्ड करना और उसे डिजिटल सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी देना, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के भाग 2 के अर्थ में ‘उसकी चारित्रिक शुचिता को धूमिल करने की धमकी’ के रूप में माना जा सकता है।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि मोबाइल फोन या संबंधित वीडियो सामग्री की बरामदगी न होना धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी के लिए दोषसिद्धि को समाप्त नहीं करता है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने उससे शादी का वादा करके यौन संबंध स्थापित किए।
उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे धमकी दी कि वह उसके नहाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देगा, जिसे कथित तौर पर उसने रिकॉर्ड किया था।
जांच पूरी होने के बाद, इस व्यक्ति पर बलात्कार और यौन संबंध बनाने के अपराधों का आरोप लगाया गया, जिसमें वैध विवाह का विश्वास दिलाकर धोखाधड़ी करना और पीड़िता पर अपवित्रता का आरोप लगाने के इरादे से आपराधिक धमकी देना शामिल था।
मुकदमे की सुनवाई समाप्त होने पर, उस व्यक्ति को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन उसे आईपीसी की धारा 506 के भाग 2 के तहत गंभीर आपराधिक धमकी के आरोप में दोषी पाया गया।
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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