रायपुर। झीरम घाटी कांड की जांच कर रहे न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्र न्यायिक जांच आयोग का दायरा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने आयोग की जांच के दायरे में 8 नए बिंदुओं को शामिल किया है। इसमें यूनिफाइड कमांड की भूमिका भी शामिल है।
प्रदेश सरकार ने नक्सल विरोधी ऑपरेशन और विशेषकर टीसीओसी की अवधि के दौरान यूनिफाइड कमांड की भूमिका, यूनिफाइड कमांड के अध्यक्ष के कर्तव्य जानना चाहे हैं। न्यायिक आयोग से यह भी बताने को कहा गया है कि क्या यूनिफाइड कमांड के तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने उन कर्तव्यों का उपर्युक्त निर्वहन किया।
इसके साथ ही आयोग से आईएएस एलेक्स पॉल मेनन की रिहाई के लिए माओवादियों और सरकार के बीच हुए समझौते की शर्तों को भी जानने को कहा गया है। बता दें कि 2010 में दंतेवाड़ा जिले के एक माओवादी हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों की शहादत के बाद यूनिफाइड कमांड का गठन हुआ था। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। झीरम घाटी हमले के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह इस भूमिका में थे।
ICC ने लगाया अंबाती रायडू की गेंदबाज़ी पर बैन, फंसे थे संदिग्ध बौलिंग एक्शन पर
अफसरों का कहना है, इस बिंदु के शामिल होने के बाद रमन सिंह भी जांच के दायरे में आ गए हैं। उन्हें बयान दर्ज करने बुलाया भी जा सकता है। आयोग का कार्यकाल 12वीं बार बढ़ाया गया है। 28 मई 2013 को तीन महीने के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग का कार्यकाल अब 31 दिसम्बर 2019 को पूरा होगा।