सुआ गीत के गवैया ,जुझत हे आर्थिक तंगी मा

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सुआ गीत के गवैया ,जुझत हे आर्थिक तंगी मा

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  • Publish Date - January 22, 2018 / 10:28 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:59 PM IST

 छत्तीसगढ़ का सुआ गीत आज लोक प्रिय है। जिसने कुछ महीने पहले ही विश्व रिकार्ड में अपने नृत्य को दर्ज करवाया है। लेकिन आप जानते हैं इस गीत को पहली बार गाने वाले छत्तीसगढ़ के लोकगायक आसाराम निषाद थे। ये वही आशा राम है जो आज बदहाली की ज़िंदगी जी रहे हैं। 

 

एक ओर जहां छत्तीसगढ़ सरकार लोक संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करती है तो दूसरी तरफ ये वही कलाकार है जो लोक संस्कृति को बचाने में तो अपना योगदान दिए है लेकिन उन्हें बचाने आज कोई आगे नहीं आ रहा। आज भी वे बनी मजदूरी कर अपना परिवार पालने के लिए मजबूर हैं।  

आशाराम निषाद कहते हैं की मैंने कई बार सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे हैं कि मुझे भी लोक कलाकार के रूप में पेंशन दी जाये लेकिन इसका लाभ आज तक मुझे नहीं मिला। उलटा लोगों ने मुझे ही ठग लिया ये बोलकर की हम आपका काम कर देंगे ? 65 वर्षीय निषाद बताते हैं कि मैं अपने चाचा झल्लू राम के साथ बहुत छोटी उम्र से ही गाने के कार्यक्रम में जाता था.मैंने कई कार्यक्रम आकाशवाणी में भी प्रस्तुत किये जिनमे सबसे अधिक लोक प्रिय हुआ छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध लोकगीत तरी हरी नाना रे नाना ,पहिरे हरा रंग साड़ी ,लोटा वाली बहिनी और चाँद सूरज तोर बैला भैसा ऐसे बहुत से गीत हैं.

वेब टीम IBC24