रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा, खरसिया से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

Ads

रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी का इस्तीफा, खरसिया से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

  •  
  • Publish Date - August 25, 2018 / 04:56 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:07 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी के लिए बड़ा दांव खेला है। रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा डीओपीटी को भेजा है। माना जा रहा है कि वे प्रशासनिक सेवा से राजनीति में भाग्य अजमाने की तैयारी में हैं। उनके बीजेपी में प्रवेश और खरसिया से विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही है। 

ये भी पढ़ें-डेंगू से दुर्ग जिले में 28वीं मौत, भाई की तबियत जानने बिहार से मायके आई महिला खुद हो गई शिकार

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से ओपी चौधरी के नौकरी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। हालांकि ओपी चौधरी इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया है। साल 2005 बैच के आईएएस चौधरी फिलहाल रायपुर के कलेक्टर हैं। इसके पहले वे दंतेवाड़ा में कलेक्टर रह चुके हैं। पिछले चुनाव के समय वे जनसंपर्क विभाग में रहे हैं। इसके बाद से वे सीएम डॉ रमन सिंह के करीबी और पसंदीदा अफसरों के रुप में गिने जाते रहे हैं। 

ये भी पढ़ें-कांग्रेस चुनाव अभियान समिति की बैठक, टिकटार्थियों के नामों पर चर्चा, स्क्रीनिंग कमेटी को भेजे जाएंगे 

आईएएस की नौकरी छोड़ने के बाद वे राजनीति में किस्मत आजमाने वाले हैं। चर्चा है कि वे रायगढ़ के खरसिया सीट से बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। चौधरी रायगढ़ जिले के रहने वाले हैं और वे अघरिया समाज से ताल्लुक रखते हैं। खरसिया सीट में इस समाज के लोगों का अच्छा प्रभाव है। ऐसे में चौधरी को उतारकर बीजेपी बड़ा राजनीतिक दांव खेलने की तैयारी में है। यहां से स्व नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल विधायक हैं। खरसिया सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। यहां से बीजेपी को सफलता नहीं हैं। लिहाजा वे चौधरी को उतारकर कांग्रेसे के इस अभेद किले को गिराना चाहती है। चौधरी स्थानीय होने के साथ युवा आइकॉन के रुप में भी लोकप्रिय हैं। 

ये भी पढ़ें- बिलासपुर डीईओ ने शिक्षक एलबी संवर्ग को गतिरोध भत्ता देने जारी किए आदेश, एरियर्स भी देने की मांग

रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहले ऐसे आईएएस है, जिन्होंने हिन्दी माध्यम से आईएएस बनने में कामयाबी हासिल की। रायगढ़ के छोटे से गांव बायंग में रहने वाले चौधरी का आईएएस बनने का सफर संघर्षो से भरा रहा। 8 साल की उम्र में मेरे पिताजी का साया सिर से उठ गया। मां चौथी तक पढ़ी थी। दादा-दादी किसानी पर निर्भर थे। घर, गांव या आस-पास ऐसा कोई माहौल नहीं था कि कोई मुझे आईएएस बनने को प्रेरित करें। 

 

वेब डेस्क, IBC24