कभी-कभी किसी की एक छोटी सी पहल कैसे एक मुहिम बन जाती है और कैसे किसी की जिंदगी संवर जाती है, ये ममता की जिंदगी को देखकर पता चलता है। रिक्शा चलाने वाले एक बुजुर्ग की नातिन ने 12 वीं की परीक्षा में 94 फीसदी अंक हासिल किए। अभावों से जूझकर जिंदगी की जंग लड़ रही ममता की खबर फेसबुक पर एक पत्रकार ने पोस्ट की और मदद के लिए लोगों ने उसे हाथों में उठा लिया। IBC24 ने भी स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप के लिए ममता को चुना है।
ये है ममता जिसने बचपन में ही बाप का बेरहम चेहरा देखा और फिर इसकी जिंदगी संवारने नाना-नानी इसे अपने साथ लेकर आ गए। मिट्टी के कच्चे घर में अभावों के बीच ममता के नाना ने रिक्शा चलाकर उसे पढ़ाया। ममता ने गरीबी से जूझते हुए 12 वीं की परीक्षा दी और 94 फीसदी नंबर हासिल किए। जब ममता के संघर्ष की ये कहानी बिलासपुर के एक पत्रकार ने फेसबुक पर पोस्ट की, तो 24 घंटे में ही उसे 782 शेयर मिले और देश-दुनिया के सैकड़ों लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए। बिलासपुर कलेक्टर ने भी ममता को दफ्तर बुलाया और अपने खर्चे पर साइकिल गिफ्ट की।
कलेक्टर ने असिस्टेंट कमिश्नर लेबर को बुलाकर ममता के रिक्शा चालक नाना वेदराम और नानी को भी सरकारी योजनाओं का लाभ देने को कहा है। ममता की मदद के लिए गुजराती समाज और व्यापारी और होटल एसोसिएशन के लोगों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। ममता के भी सपने को पंख लग गए हैं और वो सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती है। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लोकप्रिय चैनल IBC24 भी हर साल प्रतिभावान छात्राओं को स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप देती है और इसके लिए IBC24 ने जिले का नाम रोशन करने वाली ममता को चुना है।