भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अध्यापकों के संविलियन को मंजूरी दे दी है। इससे करीब 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को फायदा होगा। उन्हें सातवां वेतनमान देने को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा संविदा कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाने का फैसला लिया गया है।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार की कैबिनेट की बैठक में एक बार फिर कर्मचारियों को सौगात दी गई है। बैठक में अध्यापकों के संविलियन की बहुप्रतीक्षित मांग आखिरकार पूरी हो गई है। इससे करीब 2 लाख 37 हजार अध्यापक लाभान्वित होंगे और उन्हें एक जुलाई 2018 से सातवें वेतनमान का लाभ मिलेगा।
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मप्र सरकार के इस फैसले पर छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों की भी नजरें टिकी हुईं थी। माना जा रहा है कि शिवराज सरकार के इस फैसले को छत्तीसगढ़ में भी अपनाया जा सकता है। पिछले दिनों शिक्षाकर्मियों के संविलियन के लिए नियम-शर्तों का अध्ययन करने एक टीम मध्यप्रदेश के दौरे पर भी गई थी। ऐसे में इस फैसले से छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों के संविलियन का रास्ता खुल गया है।
मप्र सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने कैबिनेट की बैठक के बाद ब्रीफिंग में कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य को चौपट कर दिया गया था और शिक्षकों के पद को डाइंग कैडर घोषित कर दिया था। लेकिन शिवराज सरकार ने शिक्षकों के संविलियन को मंजूरी दे दी है।
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उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के एक लाख 84 हजार संविदा कर्मचारियों के संबंध में भी कैबिनेट ने फैसला लिया है, ऐसे संविदा कर्मचारियों को सीधे नहीं हटाया जा सकेगा। गंभीर शिकायत होने पर पूरी जांच पड़ताल के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा नियमित भर्ती में उन्हें 20 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा। उन्हें साल में नियमानुसार वेतनवृद्धि और अवकाश की पात्रता को भी मंजूरी दी गई है।
वेब डेस्क, IBC24