रायपुर। सीताफल के पल्प से स्वादिष्ट आइसक्रीम बनाकर उसे राजधानी रायपुर और दुर्ग, भिलाई जैसे शहरों में बेचने का कारोबार शुरू करने पर चन्द्रमणि कौषी और उनके महिला स्व-सहायता समूह की आमदनी दोगुनी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में चन्द्रमणि से बातचीत में उनके इस सामूहिक कारोबार की भरपूर तारीफ की थी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने चन्द्रमणि के हवाले से आज बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में सीताफल के पल्प से हो रही दोगुनी आमदनी के बारे में बताया था, ना कि धान की खेती से। उन्होंने महिला समूह बनाकर सीताफल प्रसंस्करण उद्योग शुरू किया है।
बता दें कि प्रधानमंत्री से चन्द्रमणि के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में बातचीत के प्रसारण के बाद एक निजी नेशनल समाचार चैनल ने इस महिला कृषक के गांव जाकर उनसे बातचीत की और उनके वाक्यों को सम्पादित कर उन्हें यह कहते हुए दिखाया कि धान की खेती से उनकी आमदनी दोगुनी नहीं हुई है। जबकि प्रधानमंत्री के साथ पिछले महीने की 20 तारीख को किसान लाभार्थियों की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के दौरान कांकेर जिले के ग्राम कन्हारपुरी निवासी चन्द्रमणि की पूरी बातचीत सीताफल के प्रसंस्करण और उस पर आधारित आइसक्रीम के कारोबार को लेकर हुई थी।
यह भी पढ़ें : आईईडी विस्फोट में 2 बीएसएफ जवान शहीद, कई नक्सलियों के मारे जाने का दावा
चन्द्रमणि ने कहा कि इस चैनल के द्वारा उनसे दो एकड़ की धान की खेती से दोगुनी आमदनी होने का सवाल पूछा गया था। चन्द्रमणि ने चैनल को बताया था कि धान की खेती से नहीं, बल्कि सीताफल से हमारी दोगुनी हुई है, लेकिन उनके इस वाक्य को पूरा नहीं दिखाया गया। वहीं कुछ अन्य टीवी चैनल के प्रतिनिधि जब उनसे इस बारे में जानकारी लेने पहुंचे तो उन्होंने बताया कि हम लोग सीताफल के बारे में काम करते हैं और मैंने तो डायरेक्ट प्रधानमंत्रीजी से ये कहा कि हमें प्रशिक्षण मिला और अब पल्प निकालते हैं, उससे आमदनी दोगुनी हुई है। हमने पल्प के बारे में दोगुनी आमदनी की बात कही थी, ना कि धान की खेती से।
चन्द्रमणि ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में प्रधानमंत्री को यह जरूर बताया था कि हम लोग पहले दो एकड़ में धान लगाते थे, लेकिन उसमें ज्यादा बेनिफिट (लाभ) नहीं मिलता था। मतलब 15 हजार से 20 हजार रूपए तक हमको आमदनी होती थी। हमारे परिवार को उसमें संतुष्टि नहीं होती थी। फिर हम लोगों ने गांव की 10-15 महिलाओं ने मिलकर एक समूह जोड़ा और कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत प्रशिक्षण लेकर सीताफल के पल्प से आइसक्रीम बनाने का कारोबार शुरू किया। प्रधानमंत्री ने जब उनसे पूछा कि पहले की तुलना में अब आय कितनी बढ़ गई तो उन्होंने बताया कि अभी दोगुनी हो गई है। मेरे साथ काम करने वाली महिलाओं की आमदनी भी दोगुनी हो गई है। पहले कोचिया (बिचौलिए) लोग 20 किलो सीताफल को 50-60 रूपए में ठगकर ले जाते थे। हम लोग कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से जुड़े। उसके बाद हम लोग सीधे 700 रूपए (सात सौ रूपए) मुनाफा कमा रहे हैं।
देखिए वीडियो
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारिता का काम है सच्चाई सामने लाना न कि सच्चाई को तोड़ना-मरोड़ना। निजी स्वार्थ के लिए श्रीमती चन्द्रमणि जैसे मेहनतकश किसानों को हतोत्साहित करना क्या @abpnewstv जैसे राष्ट्रीय चैनल को शोभा देता है? #UnfortunateJournalism pic.twitter.com/4bUsQccsJi
— Dr Raman Singh (@drramansingh) July 9, 2018
वेब डेस्क, IBC24