Reported By: priyal jindal
,Full Story of Land of Snakes Jashpur District || Image- IBC24 News File
जशपुर: बारिश का मौसम किसानों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन जशपुर जिले में इसी मौसम के साथ सर्पदंश के मामले भी तेजी से बढ़ने लगते हैं। (Full Story of Land of Snakes Jashpur) प्राकृतिक रूप से सांपों के अनुकूल वातावरण होने के कारण जिले के तपकरा क्षेत्र को लंबे समय से “नागलोक” के नाम से जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के पास इलाज की पर्याप्त व्यवस्था होने के बावजूद अंधविश्वास और अस्पताल पहुंचने में देरी कई लोगों की जान ले रही है।
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विशेषज्ञों के अनुसार जशपुर, खासकर फरसाबहार और तपकरा क्षेत्र में घने जंगल, नमी और प्राकृतिक आवास होने से सांपों की 30 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कॉमन करैत जैसे अत्यंत विषैले सांप भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में आधुनिक स्नेक रिसर्च एंड कंजर्वेशन सेंटर स्थापित किया जाए तो सर्प संरक्षण, एंटी-वेनम पर शोध, जैव विविधता संरक्षण और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
सर्पदंश की अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में होती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लोगों का जमीन पर सोना है। रात के समय करैत जैसे सांप घरों में घुसकर बिस्तर तक पहुंच जाते हैं और अनजाने में लोग उनका शिकार बन जाते हैं। (Full Story of Land of Snakes Jashpur) विशेषज्ञ और सामाजिक संस्थाएं लगातार लोगों से अपील कर रही हैं कि जमीन पर सोने से बचें और सांप काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल जाएं।
सर्प विशेषज्ञ कैसर हुसैन का कहना है कि झाड़-फूंक से सर्पदंश का इलाज संभव नहीं है। कई बार बिना विष वाले सांप के काटने या ड्राई बाइट में मरीज अपने आप बच जाता है, जिसे लोग झाड़-फूंक का असर मान लेते हैं। यही गलतफहमी कई बार जानलेवा साबित होती है। उनकी टीम गांव-गांव जाकर लोगों को वैज्ञानिक तरीके से जागरूक कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष जशपुर जिले में सर्पदंश के 635 मामले सामने आए थे, जिनमें 14 लोगों की मौत हुई। वहीं इस वर्ष अप्रैल से अब तक 196 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 5 लोगों की जान जा चुकी है। (Full Story of Land of Snakes Jashpur) विभाग का कहना है कि अधिकांश मौतें इलाज में देरी के कारण होती हैं, दवा की कमी से नहीं।
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जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है। वर्तमान में जिले में 4,608 एंटी-स्नेक वेनम वायल उपलब्ध हैं और डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को सर्पदंश के उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बरसात के मौसम में सावधानी बरतें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें और सांप काटने की स्थिति में बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
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