Donald Trump Iran Policy: ट्रंप की इस शर्त से हिल गया पूरा मिडिल ईस्ट! सऊदी अरब ने अचानक दिखाए तेवर, अब अमेरिका को लगा बड़ा झटका
Donald Trump Iran Policy: ट्रंप की एक शर्त से हिल गया पूरा मिडिल ईस्ट! सऊदी अरब ने अचानक दिखाए तेवर, अब अमेरिका को लगा बड़ा झटका
donald trump news/ image osurce: ibc24 file image
- ट्रंप की रणनीति से बढ़ा तनाव
- सऊदी ने बदला नहीं रुख
- इजरायल मुद्दे पर नई बहस
Donald Trump Iran Policy: डोनाल्ड ट्रंप की नई रणनीति ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब वॉशिंगटन और सऊदी अरब के रिश्तों में भी खटास की खबरें सामने आने लगी हैं। दरअसल ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ किसी भी संभावित शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे।
Saudi Arabia vs America: इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही
उन्होंने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही। हालांकि ट्रंप का यह बयान खाड़ी देशों को पसंद नहीं आया। कुछ ही घंटों बाद रियाद की तरफ से साफ संकेत दे दिए गए कि सऊदी अरब अपने पुराने रुख पर कायम है और फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन का स्पष्ट रास्ता तय हुए बिना इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं। गाजा युद्ध के बाद बदले हालात ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।
Iran US tension: क्या है पूरा मामला ?
दरअसल 2020 में हुए अब्राहम अकॉर्ड्स के बाद कई अरब देशों ने इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य किए थे और बाद में सऊदी अरब भी इस दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा था। लेकिन गाजा में युद्ध छिड़ने और हमास-इजरायल संघर्ष के बाद पूरे पश्चिम एशिया का माहौल बदल गया। अब सऊदी नेतृत्व किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं है। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव भी अमेरिका-सऊदी रिश्तों में खटास की बड़ी वजह बन गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। लेकिन अमेरिका ने इस योजना की घोषणा खाड़ी देशों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी, जिससे रियाद नाराज हो गया। खबरों के अनुसार मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिकी मिशन को बड़ा झटका लगा और कुछ ही घंटों में यह अभियान ठप पड़ गया।
सऊदी अरब की चिंता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर किसी खाड़ी देश ने अमेरिकी या इजरायली सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया, तो उसे जवाबी हमलों का सामना करना पड़ेगा।
2019 में सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले अब भी रियाद के लिए बड़ी चेतावनी बने हुए हैं। यही वजह है कि सऊदी अरब अब अमेरिका की हर रणनीति का आंख बंद करके समर्थन करने से बच रहा है। दूसरी ओर ईरान इस स्थिति को अपने लिए रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है और खाड़ी देशों व अमेरिका के बीच बढ़ती दूरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की “अब्राहम अकॉर्ड्स फर्स्ट” रणनीति का उल्टा असर हुआ है और इससे अमेरिका के सहयोगी देश अपने सुरक्षा हितों को ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं।
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