गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम संस्कार व संतुलित पोषण से बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव:आनंदीबेन पटेल

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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम संस्कार व संतुलित पोषण से बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव:आनंदीबेन पटेल

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  • Publish Date - June 27, 2026 / 08:57 PM IST,
    Updated On - June 27, 2026 / 08:57 PM IST

लखनऊ, 27 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को कहा कि प्रारंभिक अवस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम संस्कार एवं संतुलित पोषण से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है।

जनभवन से जारी एक बयान के अनुसार राज्यपाल पटेल ने शनिवार को राज्य स्मार्ट सिटी मिशन योजना के अंतर्गत अयोध्या धाम क्षेत्र में ब्रह्मकुण्ड गुरुद्वारे के निकट मोहल्ला दोराही कुआं में नवनिर्मित दो आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्मार्ट क्लास रूम का उद्घाटन किया।

राज्यपाल ने आंगनबाड़ी केंद्रों की बाल वाटिकाओं का अवलोकन किया तथा बच्चों के साथ संवाद किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत का उज्ज्वल भविष्य आज के नन्हे-मुन्ने बच्चों के हाथों में है।

उनके समुचित शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए प्रारंभिक अवस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्तम संस्कार तथा संतुलित पोषण अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चे की प्रथम शिक्षिका उसकी मां होती है तथा उसके बाद आंगनबाड़ी केंद्र उसके व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला बनते हैं।

यही प्रारंभिक शिक्षा आगे चलकर विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय तक पहुंचने का सुदृढ़ आधार बनती है।

पटेल ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थय एवं पोषण पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वस्थ एवं संस्कारित समाज की नींव गर्भकाल से ही रखी जाती है।

परिवार का दायित्व है कि गर्भवती महिला को पौष्टिक आहार, सकारात्मक वातावरण तथा समय-समय पर आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का अस्पताल में पंजीकरण सुनिश्चित कराया जाए तथा सभी प्रसव संस्थागत रूप से अस्पतालों में ही कराए जाएं।

उन्होंने बच्चों से प्रार्थना सुनी और स्मार्ट क्लास के माध्यम से प्रदान की जा रही शिक्षा के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र भेजने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया कि नामांकित कोई भी बच्चा अनुपस्थित न रहे।

भाषा आनन्द

संतोष

संतोष