मेरठ में पति से तलाक मिलते ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया
मेरठ में पति से तलाक मिलते ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया
मेरठ (उप्र), पांच अप्रैल (भाषा) मेरठ में पति से तलाक मिलते ही एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने ढोल-नगाड़ों से अपनी बेटी का स्वागत किया, जो एक मिसाल बन गई।
एक अधिवक्ता ने रविवार को बताया कि मेरठ स्थित परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश शक्तिपुत्र तोमर ने शनिवार को सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की पुत्री प्रणिता वशिष्ठ के तलाक को मंजूरी दे दी।
इसके बाद इस परिवार ने तलाक को सामाजिक कलंक मानने की परंपरागत सोच से अलग हटकर अनोखी मिसाल पेश की।
डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बेटी प्रणिता वशिष्ठ के तलाक के बाद उसका फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ स्वागत किया, जिसकी क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है।
प्रणिता वशिष्ठ की ओर से अधिवक्ता राजीव गिरी और नसीब सैफी ने अदालत में पैरवी की।
रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में अधिवक्ताओं ने बताया कि प्रणिता वशिष्ठ की शादी 19 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। आरोप है कि ससुराल पक्ष का व्यवहार ठीक नहीं था और प्रणिता को लगातार मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ताओं ने बताया कि एक बेटा होने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद प्रणिता ने मेरठ के परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी दी।
तलाक के फैसले के बाद परिवार ने इसे बेटी की नई शुरुआत के रूप में लिया। अदालत से बाहर आने के बाद परिजन ढोल की थाप पर नाचते-गाते उसे घर तक लेकर पहुंचे।
घर पहुंचने पर डॉ. शर्मा ने बेटी को फूल-माला पहनाकर स्वागत किया और मिठाइयां बांटीं। इस अवसर पर परिवार के सदस्य काले रंग की टी-शर्ट पहने हुए थे, जिन पर ‘आई लव माय डॉटर’ लिखा हुआ था।
शर्मा ने कहा, ‘‘अगर मेरी बेटी शादी के बाद खुश नहीं थी, तो उसे उस माहौल से बाहर निकालना मेरा कर्तव्य था। मैंने किसी प्रकार की राशि या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी को वापस घर लाया हूं।’’
प्रणिता वशिष्ठ तेजगढ़ी चौराहे स्थित ‘प्रणव वशिष्ठ जुडिशल अकादमी’ में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में परास्नातक किया है। उनके भाई प्रणव वशिष्ठ उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता थे जिनका वर्ष 2022 में चंडीगढ़ में एक हादसे में निधन हो गया था।
प्रणिता ने अन्य महिलाओं को संदेश देते हुए कहा, ‘‘अगर आप किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें। अपने लिए खड़ीं हों। खुद को मजबूत बनाएं।’’
भाषा सं आनन्द नेत्रपाल शफीक
शफीक

Facebook


