अयोध्या: Janaki Navami in Ayodhya: रामनगरी अयोध्या आज सीता नवमी यानी जानकी नवमी के पावन पर्व पर धार्मिक उल्लास और आस्था में डूबी हुई है। भक्तों में खासा उत्साह है और मंदिरों में विशेष अनुष्ठानों की तैयारियाँ जोरों पर हैं। मान्यता है कि इसी दिन वैशाख शुक्ल नवमी को जनकपुरी में माता सीता का जन्म हुआ था।
Janaki Navami in Ayodhya: दोपहर 12:00 बजे कनक भवन छोटी देवकाली मंदिर समेत अयोध्या के प्रमुख मंदिरों में माता सीता के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर मांगलिक भजन, पूजन-अर्चन, हवन, और विशेष श्रृंगार के कार्यक्रम होंगे।
Janaki Navami in Ayodhya: कनक भवन में सजावट देखते ही बनती है। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। वहीं छोटी देवकाली मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए जुटने लगे हैं। धार्मिक झांकियाँ, सीता राम विवाह प्रसंग और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ ट्रैफिक व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है।
"सीता नवमी" एक धार्मिक पर्व है जिसे वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता सीता के जन्मोत्सव को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
अयोध्या में सीता नवमी पर क्या-क्या आयोजन होते हैं?
"सीता नवमी" के अवसर पर अयोध्या में कनक भवन, छोटी देवकाली मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजन, भजन, हवन, श्रृंगार और धार्मिक झांकियाँ आयोजित की जाती हैं।
सीता नवमी के दिन अयोध्या में सबसे खास आयोजन कहाँ होता है?
"सीता नवमी" पर सबसे भव्य आयोजन कनक भवन और छोटी देवकाली मंदिर में होता है, जहाँ दोपहर 12 बजे विशेष पूजन और जन्मोत्सव कार्यक्रम किए जाते हैं।
सीता नवमी पर अयोध्या में श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
"सीता नवमी" के मद्देनज़र अयोध्या में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं, ट्रैफिक कंट्रोल के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, और पुलिस बल तैनात किया गया है।
सीता नवमी क्यों मनाई जाती है?
"सीता नवमी" माता सीता के जन्म की स्मृति में मनाई जाती है, जो जनकपुरी में वैशाख शुक्ल नवमी को राजा जनक के यज्ञ भूमि से प्राप्त हुई थीं, इसलिए यह पर्व श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है।