बरेली, तीन जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने कथित तौर पर एक अस्पताल की नर्स की अगुवाई में संचालित बाल तस्करी गिरोह के सदस्यों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह गरीब महिलाओं को निशाना बनाता था और बिक्री के लिए नवजात शिशुओं का इंतजाम करता था।
पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्यों के खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधान लागू करने और अवैध रूप से अर्जित उनकी संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी है।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने डेढ़ साल के एक बच्चे को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से बचाए जाने के बाद यह गिरोह पुलिस की नजर में आया।
अधिकारियों के अनुसार, ऋषभ को 24 मई को मनौना धाम मंदिर परिसर से अगवा कर लिया गया था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अपहरणकर्ता योगेश कन्नौजिया और पवन सिंह को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया तथा ऋषभ को उनके चंगुल से सकुशल छुड़ा लिया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें एक निःसंतान दंपति के लिए बच्चा अगवा करने के बदले 60 हजार रुपये मिलने थे।
सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच में एक बड़े नेटवर्क का पता चला, जिसमें कथित बिचौलिये और फर्जी डॉक्टर शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, लखीमपुर के रहने वाले उत्तम बाजपेयी ने कथित तौर पर अपहरण की पूरी योजना बनाई थी और उसे सीतापुर के कथित फर्जी डॉक्टर संजय विश्वास और लखीमपुर-खीरी के केशव राम उर्फ मंजेश ने ऐसा करने के लिए कहा था।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि विश्वास और केशव गिरोह के लिए कथित तौर पर बच्चों का इंतजाम करते थे।
सूत्रों के मुताबिक, अपहृत बच्चे को बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में काम करने वाली नर्स सीता को सौंपा जाना था, जो कथित रूप से इस गिरोह की सरगना है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने बताया कि आरोपी बच्चों की चोरी और तस्करी की गतिविधियों को संगठित रूप से अंजाम दे रहे थे।
उन्होंने कहा, “चूंकि, आरोपी इस काम को संगठित तरीके से अंजाम दे रहे थे, इसलिए उनके खिलाफ गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।”
पुलिस सूत्रों ने बताया कि नर्स सीता मूल रूप से बदायूं के दातागंज की निवासी है और फिलहाल मीरगंज में रह रही है।
उन्होंने बताया कि सीता के देशभर के कई निजी अस्पतालों और आईवीएफ केंद्रों से कथित तौर पर संपर्क थे।
सूत्रों ने बताया कि इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने के लिए सीता के कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया कि जांचकर्ताओं को शक है कि इस गिरोह ने कथित तौर पर उन अविवाहित गर्भवती महिलाओं से संपर्क किया, जो गुपचुप तरीके से अस्पतालों में आती थीं।
सूत्रों के अनुसार, गिरोह के सदस्यों ने बिन ब्याही गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान मदद का भरोसा दिलाया और बाद में उनके नवजात शिशुओं को बेच दिया।
अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशिका वर्मा ने बताया कि जांच में इस गिरोह के कई निजी चिकित्सा केंद्रों और आईवीएफ केंद्रों से संबंध होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस मामले में अब तक छह आरोपियों की पहचान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
भाषा
सं सलीम पारुल
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