राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता मामले में उच्‍च न्‍यायालय ने रिकॉर्ड की जांच से परहेज किया

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राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता मामले में उच्‍च न्‍यायालय ने रिकॉर्ड की जांच से परहेज किया

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 10:38 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 10:38 PM IST

लखनऊ, सात अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता विवाद के मामले में केंद्र सरकार द्वारा पेश किये गये रिकॉर्ड की जांच करने से फिलहाल परहेज किया है।

मामले की सुनवाई न्यायालय कक्ष के बजाय न्यायाधीश के चैंबर में हुई, क्योंकि केंद्र सरकार ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

मंगलवार को उच्‍च न्‍यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश में न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार के अधिकारी रिकॉर्ड के साथ मौजूद थे, लेकिन यह पीठ इस मामले में गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई की जांच करने का इरादा नहीं रखती, पीठ ने उक्त रिकॉर्ड की जांच नहीं की है।’’

पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत के 28 जनवरी, 2026 के आदेश को चुनौती दी है। लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी।

लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है।

याचिकाकर्ता कर्नाटक का एक भाजपा कार्यकर्ता है। उन्होंने गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की है।

उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, सरकारी गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट एक्ट के तहत गांधी के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं।

इससे पहले इस मामले की सुनवाई करते हुए, पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा था कि राहुल की ब्रिटिश नागरिकता के खिलाफ की गई शिकायत पर उसने क्या कार्रवाई की है।

पीठ ने खुद ही कथित विवाद से संबंधित केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूरा रिकॉर्ड मंगवाया था। रिकॉर्ड को पेश किया गया था, लेकिन मंगलवार को पीठ ने उसकी जांच नहीं की।

यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया है।

भाषा सं आनन्द

राजकुमार

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