लखनऊ, चार सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार के बाढ़ प्रभावित 26 जिलों से 17,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है और बाढ़ से अब तक किसी भी व्यक्ति या मवेशी की जान जाने की खबर नहीं है। सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, बाढ़ से करीब 3.53 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, कम से कम 17,544 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है, जबकि 4,847 लोग वर्तमान में राहत आश्रयों में रह रहे हैं।
सरकार ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि राज्य भर में कुल 1,312 बाढ़ आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं, जबकि 1,634 बाढ़ चौकियां, 1,697 नावें और मोटर बोट और 1,068 मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।
राहत तंत्र ने प्रभावित लोगों के बीच 72,897 खाद्य राहत पैकेट और 3,67,551 लंच पैकेट वितरित किए हैं। स्वास्थ्य और स्वच्छता उपायों के तहत 5.52 लाख से अधिक क्लोरीन की गोलियां और 1.87 लाख ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए हैं।
पशुओं के लिए 5,000 क्विंटल से अधिक चारा उपलब्ध कराया गया है। बयान में कहा गया है कि बाढ़ से 45,000 से अधिक पशु प्रभावित हुए हैं, लेकिन किसी पशुधन की मौत की सूचना नहीं है।
बाढ़ प्रभावित जिलों में अमरोहा, अयोध्या, आजमगढ़, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, ग़ाज़ीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, रायबरेली, रामपुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।
बयान के मुताबिक चित्रकूट में, मंदाकिनी नदी का जलस्तर 29 अगस्त को 135.20 मीटर पर पहुंच गया था जो अब घटकर 128 मीटर हो गया है लेकिन अधिकारी स्थिति और राहत कार्यों पर नजर रख रहे हैं।
चित्रकूट में कम से कम 688 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 36 प्रभावित गांवों के 13,906 लोगों को सहायता दी गई है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 28,803 लंच पैकेट और 2,065 राहत किट बांटी हैं। अठारह बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय हैं, जबकि एम्बुलेंस और दवाओं से सुसज्जित 28 चिकित्सा टीमें तैनात की गई हैं।
गाजीपुर में, पुलिस और प्रशासन ने गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण डुहिया सरैया के पास फंसे 12 चरवाहों और 2,000 से अधिक भेड़ों को बचाया।
बचाव अभियान करीब छह घंटे तक चला। देर रात सूचना मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन की संयुक्त टीम ददरी घाट पहुंची और फंसे हुए लोगों और पशुधन का पता लगाने के लिए नाइट-विजन ड्रोन का इस्तेमाल किया।
बयान में कहा गया है कि इसके बाद पीएसी फ्लड कंपनी, पुलिस, प्रशासनिक टीमों और स्थानीय नाविकों ने बचाव अभियान संचालित किया, जिसमें जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ।
बलिया में गंगा और घाघरा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे 48 गांव प्रभावित हुए हैं। यह जानकारी बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने दी।
उन्होंने कहा, ‘हम लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं।’ गंगा का जलस्तर बढ़ने से जिले के कुछ हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर भी दबाव बढ़ गया है, जबकि हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे खड़ी खरीफ की फसल खराब हो गई है।
महोबा में, जलस्तर बढ़ने के कारण उर्मिल और क्योलारी बांधों से लगभग 3,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी छोड़े जाने से महोबा के नौ और पड़ोसी जिले झांसी के छह गांवों पर असर पड़ सकता है।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजेश सिंह ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘हम घोषणाएं कर रहे हैं और लोगों से नदियों, नालों और नहरों से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि कोई अप्रिय घटना न हो।’’
चंदौली में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने बाढ़ प्रभावित चुरमुली गांव का दौरा किया और राहत कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को भोजन, राशन किट, पीने का पानी और दवाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
साथ ही समय पर मुआवजा देने के लिए फसलों, घरों और पशुओं को हुए नुकसान का तुरंत आकलन करने का भी आदेश दिया। स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा टीमों को भी प्रभावित इलाकों का नियमित दौरा करने और बचाव के उपाय करने के निर्देश दिए गए।
भाषा जफर सं आनन्द संतोष
संतोष