उप्र में ‘जस्टिस मोर्चा’ की घोषणा, शिक्षा और रोजगार के लिए 50 दिन का प्रदेशव्यापी अभियान
उप्र में ‘जस्टिस मोर्चा’ की घोषणा, शिक्षा और रोजगार के लिए 50 दिन का प्रदेशव्यापी अभियान
लखनऊ, 10 अगस्त (भाषा) दिल्ली में हाल ही में हुए ‘जेन-जी’ के विरोध प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न युवा संगठनों ने शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए ‘जस्टिस मोर्चा’ के गठन की घोषणा की है।
इसके साथ ही उन्होंने 12 अगस्त से शुरू होने वाले 50 दिवसीय राज्यव्यापी अभियान का भी ऐलान किया है।
सोमवार को जारी एक बयान के मुताबिक लखनऊ के प्रेस क्लब में यह घोषणा की गई और मोर्चा ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा भी रखी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों और काकरोच जनता पार्टी (काजपा) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चले प्रदर्शन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस मोर्चे के गठन को अहम माना जा रहा है।
बयान के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर 12 अगस्त से इस अभियान की शुरुआत होगी। इसका उद्देश्य शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य पर व्यापक संवाद करना है। 20 अगस्त को गोरखपुर के चौरीचौरा से साइकिल यात्रा शुरू होगी, जो दो अक्टूबर को लखनऊ के काकोरी में समाप्त होगी।
बयान के मुताबिक, ‘चौरीचौरा से काकोरी तक’ की यह यात्रा प्रदेश के युवाओं की आकांक्षाओं और सवालों को आवाज देगी। यात्रा के दौरान छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, बेरोजगार युवाओं और सामाजिक समूहों से संवाद कर स्थानीय मुद्दे उठाए जाएंगे। इसके साथ अगले 50 दिनों तक प्रदेश के सभी 75 जिलों के 800 से अधिक कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में नुक्कड़ सभाएं, छात्र-युवा बैठकें और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
जस्टिस मोर्चा का कहना है कि उत्तर प्रदेश का युवा आज बदहाल शिक्षा व्यवस्था, सरकारी संस्थानों के कमजोर ढांचे, बढ़ती बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, भर्तियों में देरी और सीमित रोजगार के कारण गहरे असंतोष में है। यह केवल युवाओं का नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के भविष्य का सवाल है।
मोर्चा प्रदेश के युवाओं के बीच जाकर उनके सवाल सुनेगा, स्थानीय मुद्दे उठाएगा और शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता व समान अवसर के पक्ष में जनसमर्थन तैयार करेगा।
जस्टिस मोर्चा की 10 प्रमुख मांगें भी सार्वजनिक की गई हैं जिनमें वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी करना और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आयोजित कराना और स्वीकृत लेकिन रिक्त पड़े सभी सरकारी पदों को तत्काल भरना शामिल हैं।
साथ ही इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 को वापस लेने की भी मांग की गयी है।
भाषा मनीष आनन्द गोला
गोला

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