केजीएमयू में दरगाह की जमीन की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका खारिज

केजीएमयू में दरगाह की जमीन की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका खारिज

केजीएमयू में दरगाह की जमीन की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका खारिज
Modified Date: May 30, 2026 / 10:34 pm IST
Published Date: May 30, 2026 10:34 pm IST

लखनऊ, 30 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ‘किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी’ (केजीएमयू) के परिसर में हजरत मखदूम शाह मीना साहिब दरगाह और हाजी-उल-हरमैन शाह दरगाह की मजारों की जमीन की सुरक्षा की अनुरोध वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि केजीएमयू की गतिविधियों से इस जमीन पर असर पड़ रहा है।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने सैयद बाबर इस्लाम और एक अन्य याचिकाकर्ता की याचिका पर यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि दोनों दरगाहों से जुड़ी संपत्तियों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की जा रही है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भूमि के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण किया गया था और केजीएमयू प्रशासन द्वारा की गई गतिविधियां दरगाह की भूमि को प्रभावित कर रही थीं।

उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में हस्तक्षेप को रोकने और मजारों की संपत्तियों की सुरक्षा के निर्देश देने की मांग की।

सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि दरगाह प्रबंधन समिति ने पहले इसी विवाद को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन कार्यवाही में, केजीएमयू ने कहा था कि दरगाह परिसर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और श्रद्धालुओं को उपासना स्थल पर जाने या उपासना करने में कोई बाधा नहीं आई।

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि दरगाह की संपत्ति और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रबंधन समिति ही विधिक रूप से अधिकृत संस्था है। पीठ ने कहा कि केवल श्रद्धालु होने के आधार पर कोई व्यक्ति दरगाह की संपूर्ण संपत्ति के संरक्षण और प्रबंधन संबंधी अधिकारों को लेकर याचिका दाखिल नहीं कर सकता।

भाषा सं जफर राजकुमार

राजकुमार


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