तकनीकी की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: योगी

तकनीकी की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: योगी

तकनीकी की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को बनाएं पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल: योगी
Modified Date: June 8, 2026 / 09:58 pm IST
Published Date: June 8, 2026 9:58 pm IST

लखनऊ, आठ जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि तकनीकी की मदद से रजिस्ट्री कार्यालयों को पारदर्शिता और जनसुविधा का आदर्श मॉडल बनाएं।

एक सरकारी बयान के अनुसार योगी आदित्यनाथ ने स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेश गतिविधियों और शहरीकरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विभाग को अधिक पारदर्शी, तकनीकी आधारित, उत्तरदायी और जनसुविधा केंद्रित बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय आमजन के प्रत्यक्ष संपर्क वाले कार्यालय हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं आधुनिक, व्यवस्थित और नागरिक केंद्रित होनी चाहिए।

उन्होंने उप निबंधक कार्यालयों को चरणबद्ध ढंग से पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर विकसित करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों से प्रतिवर्ष लगभग 2.4 करोड़ लोगों का प्रत्यक्ष संपर्क होता है। इसे देखते हुए ‘हेल्प डेस्क’, टोकन एवं ‘क्यू मैनेजमेंट सिस्टम’, आधुनिक प्रतीक्षालय, महिला एवं शिशु कक्ष, डिजिटल सुविधाएं तथा अन्य नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा और असुविधा का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग राज्य की राजस्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।

बैठक में बताया गया कि 2016-17 में विभाग की सकल आय 11,613.84 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 32,598.49 करोड़ रुपये हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत लेखपत्रों की संख्या 28.25 लाख से बढ़कर 49.34 लाख से अधिक हो गई।

मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को आगे बढ़ाते हुए राजस्व वृद्धि के साथ सेवा गुणवत्ता और नागरिक संतुष्टि को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि तकनीकी के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, विवाद कम करने और राजस्व अपवंचन रोकने में मदद मिलेगी।

बयान के मुताबिक बैठक में कॉरपोरेट पुनर्गठन, विलय, विभाजन, समामेलन, अधिग्रहण, सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी), शेयरधारिता में परिवर्तन, आवासीय सहकारी समितियों तथा रेरा के अंतर्गत विक्रय करारों से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्पष्ट और व्यावहारिक स्टाम्प शुल्क व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन करते हुए ऐसा विधिक ढांचा तैयार किया जाए जिससे निवेश को प्रोत्साहन मिले, कारोबार सुगमता मजबूत हो, विवादों में कमी आए और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहें।

भाषा आनन्द राजकुमार

राजकुमार


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