लखनऊ, दो अगस्त (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने संविधान की नौवीं अनुसूची में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण को शामिल नहीं करने को लेकर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस पर निशाना साधा।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि देश के दो प्रमुख दल इन समुदायों के सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक आजादी के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे ‘‘उदारवादी’’ रहे हैं, लेकिन ‘‘सुधारवादी नहीं’’।
बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘सामाजिक उत्पीड़न की तुलना में राजनीतिक उत्पीड़न कुछ भी नहीं। क्या देश के, खासकर करोड़ों दलितों और आदिवासियों का जीवन द्वेष तथा भेदभाव-मुक्त, आत्म-सम्मान तथा स्वाभिमान वाला हो पाया? अगर नहीं तो फिर जाति के आधार पर बांटे तथा पछाड़े गए इन वर्गों के बीच आरक्षण का बंटवारा कितना उचित?’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के एससी, एसटी तथा ओबीसी के प्रति कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों/सरकारों का रवैया उदारवादी रहा है, सुधारवादी नहीं। वे इनके सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक आजादी के पक्षधर नहीं हैं, वरना इन लोगों के आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर इसकी सुरक्षा जरूर की गयी होती।’’
भाषा जफर खारी
खारी