‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की बदलती संयुक्त युद्ध नीति को मजबूत साबित किया है: पूर्व कमांडर

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की बदलती संयुक्त युद्ध नीति को मजबूत साबित किया है: पूर्व कमांडर

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 08:39 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 08:39 PM IST

लखनऊ, 12 मई (भाषा) सेना की पश्चिमी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की बदलती संयुक्त युद्ध नीति को मजबूत साबित किया है।

उन्होंने कहा कि सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल अब केवल अवधारणा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि असली सैन्य कार्रवाई में दिखाई भी दिया है।

उन्होंने लखनऊ में स्थित मध्य कमान मुख्यालय में स्ट्राइव इंडिया द्वारा आयोजित “ऑपरेशन सिंदूर 2.0 : सबक, रणनीति और संभावनाएं” विषय पर एक व्याख्यान के दौरान यह बात कही।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और उसके बाद की स्थिति के दौरान पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी संभाल चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)कटियार ने कहा कि एकीकृत वायु कमांड एवं नियंत्रण प्रणाली ने अलग-अलग मोर्चों पर खतरों की तुरंत पहचान करने और तत्काल जवाब देने में मदद की।

उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय सेना की भूमिका बचाव, क्षेत्रीय नियंत्रण और युद्ध के लिए तैयार रहने पर केंद्रित रही।

बयान के अनुसार इसके साथ ही उन्होंने भारत की बदली हुई बचाव रणनीति, खुफिया जानकारी पर आधारित युद्ध प्रणाली और तेज सैन्य कार्रवाई को संभव बनाने में राजनीतिक इच्छाशक्ति की भूमिका पर भी बात की।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के संघर्षों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इनमें ड्रोन, साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हाइपरसोनिक हथियार जैसी तकनीकों का अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को लगातार नयी तकनीकों के अनुसार खुद को ढालते रहना जरूरी है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, रक्षा विश्लेषक और पूर्व सैनिक शामिल हुए।

अपने समापन भाषण में लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि ऐसे विचार-विमर्श सैन्य और पूर्व सैनिक समुदाय के बीच पेशेवर आत्म-चिंतन को मजबूत करते हैं। उन्होंने सेना की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि हर अभियान से हासिल हुए अनुभव से सीख ली जाती है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भाग लेने वाले सेना के जवानों को श्रद्धांजलि भी दी और उनके साहस तथा पेशेवर दक्षता की सराहना की।

भाषा आनन्द जोहेब

जोहेब