मेरठ, 12 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मेरठ में मोहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिक्षेत्र में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) कलानिधि नैथानी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने, ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने तथा किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए।
पुलिस के अनुसार, मोहर्रम 17 जून से शुरू होगा जबकि ताजिया और मुख्य जुलूस 26 जून को निकाले जाएंगे।
परिक्षेत्र के चार जिलों मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ में कुल 241 मजलिसें, 395 जुलूस और 560 ताजिए प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा 81 कर्बला स्थलों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत सात अपर पुलिस अधीक्षक, 25 क्षेत्राधिकारी, 102 निरीक्षक, 512 उपनिरीक्षक, 922 मुख्य आरक्षी, 1,540 आरक्षी तथा 832 होमगार्ड व पीआरडी जवान तैनात किए गए हैं।
इसके साथ ही पीएसी की एक कंपनी और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की एक कंपनी को भी तैनात किया गया है।
पुलिस ने परिक्षेत्र में 83 स्थानों को संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया है।
पुलिस के मुताबिक, इनके लिए 24 जोन, 81 सेक्टर और त्वरित कार्य बल की 59 टीम (क्यूआरटी) गठित की गई हैं।
पुलिस ने बताया कि जुलूस मार्गों पर 47 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है और संवेदनशीलता के आधार पर मेरठ का भावनपुर थाना और बुलंदशहर का खुर्जा नगर थाना अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
नैथानी ने निर्देश दिए कि ताजियों की ऊंचाई परंपरा और निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे तथा सभी जुलूस तय मार्गों से ही निकाले जाएं।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार के अवैध अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन पर रोक रहेगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने मिश्रित आबादी और संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी, पैदल गश्त और सोशल मीडिया निगरानी बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि जुलूस मार्गों पर लगाए गए 1,072 सीसीटीवी कैमरों के जरिए गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि साथ ही शांति समितियों, धर्मगुरुओं और अंजुमनों के साथ 364 बैठकें आयोजित कर आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है।
भाषा सं जफर जितेंद्र
जितेंद्र