वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में शुरू हुआ ‘फूल बंगला उत्सव’

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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में शुरू हुआ ‘फूल बंगला उत्सव’

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  • Publish Date - March 29, 2026 / 11:11 PM IST,
    Updated On - March 29, 2026 / 11:11 PM IST

मथुरा (उप्र), 29 मार्च (भाषा) मथुरा के मंदिरों में बढ़ती गर्मी में ठाकुर जी को ‘ठंडक’ पहुंचाने के उपाय शुरू किये जाने के बीच वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में 134 दिनों तक चलने वाला ‘फूल बंगला उत्सव’ रविवार को प्रारंभ हो गया।

यह बढ़ती गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंदिर के अंदर फूलों की सजावट करके तापमान कम करने पर केंद्रित एक उत्सव है।

श्री बांके बिहारी मंदिर के सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि लाल पत्थर से बनी इमारत और मंदिर को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीयों के इस्तेमाल से गर्मियों में मंदिर के अंदर का तापमान बढ़ जाता है और वहां रहना मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालात को बेहतर बनाने के उपाय के तौर पर फूलों की सजावट शुरू की गई। बेला, मोगरा, गुलाब, चमेली, कार्नेशन, गेंदा, लिली, कमल और ऑर्किड जैसे विभिन्न सजावटी और खुशबूदार फूल कानपुर, कन्नौज और अजमेर से भी मंगाए जाते हैं। गुलाब और मोगरा ठाकुर बांके बिहारी के पसंदीदा फूल हैं।’’

गोस्वामी ने बताया कि रविवार को उत्सव के पहले दिन सुबह और शाम दोनों समय की आरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि इस साल हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना (अधिक मास) होने के कारण फूल बंगला उत्सव अधिक समय तक चलेगा।

श्री बांके बिहारी मंदिर के एक अन्य सेवायत शशांक गोस्वामी ने बताया कि 2016 से पहले मंदिर में फूल बंगला के दर्शन केवल शाम को ही होते थे लेकिन जुलाई 2016 में उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद अब फूल बंगला के दर्शन सुबह के समय भी होते हैं।

उन्होंने बताया कि फूलों की सजावट में इस्तेमाल हुए फूलों को बाद में विधवाओं के लिए बने आश्रम ‘आश्रय सदन’ में भेज दिया जाता है, जहां इन फूलों से अगरबत्तियां बनाई जाती हैं।

श्री राधा रमण मंदिर के सेवायत दिनेश चंद्र गोस्वामी ने कहा, ‘‘ब्रज भूमि में भक्ति का मुख्य भाव ‘माधुर्य भाव’ (प्रेमपूर्ण भाव) है। हम भगवान कृष्ण की सेवा लला (अपने बच्चे) के रूप में करते हैं। भक्ति का अर्थ है ठाकुर जी की खुशी के बारे में सोचना।’’

गोस्वामी ने बताया कि राधा रमण जी को जल, मौसमी फल और शरबत चढ़ाने के लिए पूरे एक महीने तक एक ‘तुताई’ (मिट्टी के बर्तन) का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे प्रसाद ठंडा रहता है। उन्होंने बताया कि तापमान को बनाए रखने के लिए हर दिन एक नए बर्तन का इस्तेमाल किया जाता है और चढ़ाए गए प्रसाद को मंदिर के सेवायतों के बीच बांटा जाता है।

गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर जी को प्रसाद के रूप में आम, केला, लीची, ठंडाई, लस्सी और छाछ चढ़ाई जाती है। उन्होंने बताया कि अब भोग प्रसाद में केसर और सूखे मेवों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है।

मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि इस त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन के लिए आएंगे। उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्थाएं की गई हैं। हम आपातकालीन और सामान्य सेवाओं की चौबीसों घंटे उपलब्धता भी सुनिश्चित कर रहे हैं।’’

भाषा सं. सलीम गोला

गोला