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लखनऊ, 19 जनवरी (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी सदनों पर जनता के विश्वास को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए सोमवार को कहा कि इन लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के सामने और प्रामाणिकता के साथ अधिक जवाबदेह बनाने की जिम्मेदारी पीठासीन अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की है।
बिरला ने यहां आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि हालांकि नवाचार के जरिये विधानसभाओं की कार्यवाही जनता तक पहुंचाने के लिये उसका सीधा प्रसारण और डिजिटलीकरण कर दिया है लेकिन अब भी बहुत सी चुनौतियां हैं जिनका समाधान निकालना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ”हम किस तरीके से राज्यों की विधानसभाओं को जनता के लिये और प्रामाणिक बनाएं, इसकी सबसे अधिक जिम्मेदारी विधानमंडल के अध्यक्षों की है और हमारे जनप्रतिनिधियों की भी है। हम अलग-अलग राजनीतिक दलों से जीत कर आते हैं, हमारी अलग-अलग विचारधारा है लेकिन जब हम चुनकर आते हैं तो जनता की अपेक्षा होती है कि हम उनकी आकांक्षाओं और उनकी चुनौतियों तथा कठिनाइयों को सदन में रखें।”
उन्होंने विधायी सदनों में पीठासीन अधिकारियों की निष्पक्ष भूमिका की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ”हम विधानसभाओं की श्रेष्ठ परंपराओं को लागू करें। विधानसभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में हमारी भूमिका न्याय संगत हो, निष्पक्ष हो, सभी को अपने विचार रखने का अधिकार मिले, सबको अपनी भावनाएं, अपने क्षेत्र की चुनौतियों और कठिनाइयों के बारे में बोलने का समय मिले, यह भी हम पीठासीन अधिकारियों की जिम्मेदारी है।”
बिरला ने कहा, ”पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन से हम इस संकल्प के साथ निकलें कि हमारी भूमिका न्यायपूर्ण हो, निष्पक्ष हो, निर्बाध हो। हम किसी भी राजनीतिक दल से चुनकर आएं लेकिन जब पीठासीन अधिकारी के पद पर बैठें तो हमें न्यायपूर्ण होते दिखना भी चाहिए और न्यायपूर्ण तरीके से काम करना भी चाहिए क्योंकि देश हमें देखता है, राज्य की जनता हमें देखती है।”
लोकसभा अध्यक्ष ने सत्तापक्ष और विपक्ष की अहमियत का जिक्र करते हुए कहा, ”विधानसभा में जहां सकारात्मक चर्चा होती है, वहां असहमति भी होती है। सहमति और असहमति हमारे लोकतंत्र की ताकत हैं। जब सारे विचार और दृष्टिकोण आएंगे, सबका मत आएगा तभी हम लोकतांत्रिक मूल्यों को ठीक से स्थापित कर पाएंगे और इसीलिए पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन में भी हम लोग दो दिन तक चर्चा और संवाद करेंगे ताकि इन संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास और भरोसा बढ़े।”
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास और भरोसा बढ़ाने के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में अनेक परिवर्तन किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि संसद में स्थाई समितियां बनाने का निर्णय, संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण, अधिकतम राज्यों को और केंद्र को जोड़कर विधानसभा और संसद के नियम और प्रक्रियाएं बनाई गई हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को लम्बे समय तक चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा, ”पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कई बार यह चर्चा हुई है कि राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही को एक निश्चित समय तक तो चलना ही चाहिए। यह हमारा हमेशा मत रहा है कि अगर लोकतंत्र को मजबूत करना है तो लोकतंत्र के अंदर जितना सदन चलेगा, उतनी अच्छी चर्चा होगी।”
इस अवसर पर राज्यसभा के उप सभापति डॉक्टर हरिवंश, प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय भी उपस्थित थे।
भाषा सलीम राजकुमार
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