वाराणसी (उप्र), 20 मई (भाषा) वाराणसी के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एमए-इतिहास के चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा के प्रश्न पत्र में ब्राह्मणवाद से जुड़े प्रश्न को लेकर बुधवार को इतिहास विभाग के छात्रों ने प्रदर्शन किया।
छात्रों का आरोप है कि प्रश्न की भाषा और विषय वस्तु विवादित है। छात्रों ने विश्वद्यालय प्रशासन से इस मामले में स्पष्टीकरण देने और दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।
छात्रों ने बताया कि एमए इतिहास के चतुर्थ सेमेस्टर के प्रश्न पत्र में मंगलवार को एक सवाल पूछा गया कि ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता शब्द से आप क्या समझते है?
उन्होंने बताया कि इसी प्रश्न के अगले हिस्से में यह भी पूछा गया, ‘‘चर्चा कीजिये कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृ सत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली।’’
इस मामले की जानकारी मिलते ही ब्राह्मण समाज में खासा रोष उत्पन्न हो गया।
ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जानबूझकर एक खास विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है और एक विशेष वर्ग को लगातार निशाना बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने भी इस विवाद पर नाराजगी जताई और शिक्षा संस्थानों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हस्तक्षेप से मुक्त रखने की मांग की।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में एमए इतिहास की परीक्षा में ब्राह्मणवादी पितृसत्ता जैसे शब्दों को जिस प्रकार प्रश्न के रूप में प्रस्तुत किया गया है, उसने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।’’
राय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान में शिक्षण संस्थानों पर आरएसएस की विचारधारा थोपी जा रही हैं जो समाज में वैचारिक टकराव और जातीय विभाजन को बढ़ावा देती है।
उन्होंने कहा कि वेदों, उपनिषदों, भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य और शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है और ब्राह्मण समाज सदैव पूजनीय था, है और रहेगा।
राय ने कहा कि किसी भी जाति को अपमानित करने या उसे संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता भारतीय संस्कृति और संविधान दोनों के विरुद्ध है।
भाषा सं सलीम धीरज
धीरज