न्यायालय ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की कम उपलब्धता पर जतायी चिंता, सरकार को दी नसीहत

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न्यायालय ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की कम उपलब्धता पर जतायी चिंता, सरकार को दी नसीहत

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  • Publish Date - April 23, 2026 / 12:58 AM IST,
    Updated On - April 23, 2026 / 12:58 AM IST

लखनऊ, 22 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अस्पतालों में वेंटिलेटर की कम उपलब्धता पर गंभीर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि अगर गम्भीर रूप से बीमार मरीज़ों को समय पर जरूरी उपकरण नहीं मिल पाते तो उनकी उपलब्धता के आंकड़ों वाले दावे बेमानी हो जाते हैं।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मनजीव शुक्ला ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल उठाया कि क्या कोई भी अस्पताल हलफनामा देकर यह कह सकता है कि जब भी ज़रूरत होगी, तब मरीज को वेंटिलेटर तुरंत उपलब्ध कराया जाएगा।

अदालत ने टिप्पणी की कि अगर ऐसी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती तो वेंटिलेटर की उपलब्धता के बारे में पेश किये गये आंकड़ों का कोई मतलब नहीं रह जाता।

पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वेंटिलेटर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि इनकी कमी के कारण किसी की जान न जाए।

अदालत ने अपने सामने पेश किये गये आंकड़ों पर असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने यह पाया कि असल मांग का आकलन करने और जीवन बचाने वाले इलाज के लिए ज़रूरी वेंटिलेटर की संख्या तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र मौजूद नहीं है।

पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि स्वास्थ्य सेवा के लिए राज्य के बजट का कितना हिस्सा आवंटित किया गया है और चिकित्सा ढांचे की मौजूदा स्थिति के बारे में पूरी जानकारी देने को कहा।

अदालत ने राज्य सरकार को अपने नजरिये पर फिर से विचार करने की नसीहत देते हुए यह भी कहा कि सरकार को सिर्फ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करके ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने राज्य सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि क्या निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक ढांचा मौजूद है?

यह सवाल खास तौर पर इलाज के लिए ली जाने वाली फीस और दी जाने वाली सेवाओं की निगरानी के संदर्भ में पूछा गया था।

इस मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके उन्हें पक्षकार बनाया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।

भाषा सं. सलीम रंजन

रंजन