लखनऊ, 24 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह से धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी एवं मौजूदा विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अक्षय प्रताप सिंह और अन्य लोगों को राहत देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने याचिका को खारिज करते हुए लखनऊ की सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के आदेश को सही ठहराया और मामले की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया।
अक्षय प्रताप सिंह ने रोहित कुमार सिंह, अनिल कुमार सिंह और रामदेव यादव के साथ मिलकर विशेष अदालत के 18 फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी।
भानवी सिंह ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने उनकी फर्म मेसर्स सारंग एंटरप्राइजेज की कीमती संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा करने की साजिश रची थी।
उन्होंने दावा किया कि फर्म की संपत्तियों को गैर-कानूनी तरीके से कहीं और स्थानांतरित करने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए गए और उनमें हेरफेर किया गया। भानवी ने कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अदालत से आग्रह किया था कि वह लखनऊ के हजरतगंज थाने को प्राथमिकी दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दे।
इससे पहले, 19 अक्टूबर 2023 को न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने के बजाय उनके आवेदन को एक शिकायत प्रकरण के तौर पर लिया था।
भानवी सिंह ने इससे असंतुष्ट होकर एक पुनरीक्षण याचिका दायर करके उस आदेश को चुनौती दी थी। विशेष एमपी/एमएलए अदालत ने 18 फरवरी 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को रद्द कर दिया और मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया।
विशेष अदालत के 18 फरवरी 2026 के इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
भाषा सं सलीम धीरज
धीरज