Badrinath-Kedarnath Non Hindus Ban || Image- Badrinath-Kedarnath Temple Committee file
देहरादून: उत्तराखंड के चार धाम मंदिरों, केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनात्री और गंगोत्री में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने वाले प्रस्ताव को बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) और गंगोत्री एवं यमुनात्री धाम मंदिर समितियों ने सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। (Badrinath-Kedarnath Non Hindus Ban) यह प्रतिबंध सिखों सहित हिंदू धर्म की अन्य शाखाओं के अनुयायियों पर लागू नहीं होगा राज्य के दूसरे 44 मंदिरों के लिए भी इसी प्रकार के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक अधिकारियों की अगली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि प्रस्तावित प्रतिबंध “दीर्घकालीन परंपरा” पर आधारित है। उन्होंने कहा, “आदि शंकराचार्य के समय से ही इसका पालन किया जाता रहा है। धार्मिक परंपराओं को संरक्षित करने में हमें कुछ भी गलत नहीं लगता।” उन्होंने आगे कहा कि “ऐतिहासिक रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश तीर्थ स्थलों पर प्रतिबंधित रहा है।”
संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला देते हुए, जो धार्मिक समुदायों को अपने मामलों के प्रबंधन का अधिकार देता है, द्विवेदी ने कहा कि समिति को ऐसा निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। (Badrinath-Kedarnath Non Hindus Ban) द्विवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि “गैर-हिंदू” शब्द का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। “जो लोग हमारे धर्म का सम्मान करते हैं, उनका स्वागत है। धाम आस्था के केंद्र हैं, पर्यटन के नहीं।”
#BREAKING: Badrinath-Kedarnath Temple Committee (BKTC) announced that non-Hindus will be barred from entering Badrinath–Kedarnath Dham and other temples under its control. pic.twitter.com/N2S8d5RcSh
— IANS (@ians_india) January 26, 2026
इस बीच, उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के 105 घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है और हरिद्वार और ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र शहर’ घोषित करने पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू होने वाले हरिद्वार अर्धकुंभ से शुरू हो सकती है और इसमें गंगा सभा के संस्थापक मदन मोहन मालवीय से संबंधित 1916 के समझौते के प्रावधानों का सहारा लिया जा सकता है।
गौरतलब है कि, इससे पहले छोटे चार धामों में शामिल गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। यह निर्णय गंगोत्री मंदिर समिति की हाल ही में आयोजित बैठक में लिया गया था। (Badrinath-Kedarnath Non Hindus Ban) मंदिर समिति के अनुसार यह प्रतिबंध न केवल गंगोत्री धाम बल्कि मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा पर भी लागू होगा। इसके साथ ही मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में इस निर्णय को प्रभावी किया जाएगा।
मंदिर समिति का कहना है कि यह फैसला धार्मिक परंपराओं, आस्था और मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि धाम की धार्मिक मर्यादाओं और परंपरागत व्यवस्थाओं के संरक्षण के लिए यह कदम आवश्यक था। बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए मंदिर परिसरों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
इस पूरे मामले पर सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उसमें हमारा स्पष्ट मत है, जितने भी धार्मिक स्थल हैं, देवस्थान हैं, इन स्थानों को देखने वाले धार्मिक सगठनों के लोग हैं, हमारा पूज्य संत समाज है, हमने कहा है कि जो भी उनकी राय होगी उनके अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी। (Badrinath-Kedarnath Non Hindus Ban) पहले कुछ कानून भी बने हैं। उनका अभी अध्ययन कर रहे हैं, उन कानूनों के आधार पर आगे बढ़ेंगे।
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