Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,CG High Court On Nursing Admission: छत्तीसगढ़ के हजारों छात्रों को बड़ी राहत, नर्सिंग प्रवेश में 10 परसेंटाइल की शर्त रद्द, HC ने इतने दिनों में दोबारा काउंसलिंग के दिए आदेश /image: AI Generated
बिलासपुर। CG High Court On Nursing Admission: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के निजी नर्सिंग कॉलेजों में बी.एससी. नर्सिंग पाठ्यक्रम में दाखिले को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है, जिसके तहत प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम 10 परसेंटाइल अंक पाने की अनिवार्यता तय की गई थी। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की वैधानिक संस्था INC द्वारा दी गई ढील को राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक मर्जी से नहीं बदल सकती।
CG High Court On Nursing Admission जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन और एक अन्य याचिका की संयुक्त सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है, इंडियन नर्सिंग काउंसिल INC द्वारा दी गई छूट के अनुरूप बिना किसी न्यूनतम परसेंटाइल की शर्त के, केवल मेरिट के आधार पर 15 दिनों के भीतर नए सिरे से काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करें।
CG High Court On Nursing Admission मामला शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए बी.एससी. नर्सिंग कोर्स में दाखिले से जुड़ा है। शुरुआत में इंडियन नर्सिंग काउंसिल INC के नियमों के तहत सामान्य वर्ग के लिए 50, PWD के लिए 45 और SC/ST/OBC के लिए 40 परसेंटाइल की पात्रता तय थी। जब काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हुई, तो राज्य की कुल 7,811 सीटों में से 4,147 सीटें खाली रह गईं, आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र कठिन परसेंटाइल की शर्त को पार नहीं कर पाए थे।
कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए राज्य के DME ने 28 नवंबर 2025 को INC को पत्र लिखकर परसेंटाइल की शर्त में पूरी तरह छूट देने का अनुरोध किया था। INC ने 29 दिसंबर 2025 को इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सीटों को भरने के लिए परसेंटाइल मानदंडों में ढील दे दी। INC से हरी झंडी मिलने के बाद, छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने उसी दिन 29 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर दिया कि जिन छात्रों को प्रवेश परीक्षा में कम से कम 10 परसेंटाइल मिले हैं, केवल वही नए सिरे से काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे। इस मनमाने फैसले के कारण ढील मिलने के बाद भी 2,000 से अधिक सीटें खाली रह गईं। इस निर्णय को प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन और कुछ वंचित वर्ग के छात्रों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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